अमेरिका से अनदेखी: ऑस्ट्रेलिया को अपने हितों पर फिर से विचार करना चाहिए?

अमेरिका से अनदेखी: ऑस्ट्रेलिया को अपने हितों पर फिर से विचार करना चाहिए?

कैनबरा। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी पर उस समय सवाल उठने लगे हैं जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। यह घटना न केवल दोनों देशों के संबंधों में तल्खी का संकेत देती है, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई जनता के बीच इस गठबंधन को लेकर भरोसा भी डगमगाने लगा है।

हाल ही में आए जनमत सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों में अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषकर तब, जब अमेरिका की तरफ से ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के साथ व्यवहार में एक तरह की असम्मानजनक प्रवृत्ति देखी गई है।

डोनाल्ड ट्रंप के इस रवैये ने सवाल खड़ा कर दिया है – जब अमेरिका हमें बराबरी का सम्मान नहीं देता, तो हमें उसके पीछे आँख बंद कर क्यों चलना चाहिए? क्या केवल सामरिक सुरक्षा और ऐतिहासिक गठबंधन ही पर्याप्त कारण हैं, या फिर हमें अपने राष्ट्रीय हितों की नई परिभाषा तय करनी चाहिए?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत, जापान और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ ऑस्ट्रेलिया को अपने रिश्ते और मजबूत करने चाहिए ताकि वह केवल एक ध्रुवीय नीति पर निर्भर न रहे। अमेरिका से दोस्ती जरूरी है, लेकिन वह दोस्ती आत्मसम्मान के साथ होनी चाहिए, न कि उपेक्षा के साथ।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट है कि जनता में अमेरिका की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया अपनी विदेश नीति में क्या बदलाव करता है।