कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने संकेत दिया है कि उनका देश फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने पर विचार कर सकता है, भले ही फिलिस्तीन के कुछ हिस्सों पर वर्तमान में हमास का नियंत्रण हो।
बर्क ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह स्थिति अभूतपूर्व नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि ऑस्ट्रेलिया ने इराक की सरकार को मान्यता दी थी, जबकि 2014-2017 के बीच देश के उत्तरी हिस्सों पर आतंकी संगठन आईएसआईएस का कब्ज़ा था। बर्क के अनुसार, "किसी हिस्से में उग्रवादी संगठन का नियंत्रण होना, पूरे देश की वैधता को नकारने का कारण नहीं बन सकता।"
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ऑस्ट्रेलिया के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीन को मान्यता देने को लेकर बहस तेज़ हो रही है। हाल के महीनों में, पश्चिम एशिया में युद्ध और ग़ाज़ा में मानवीय संकट को देखते हुए, कई देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। नॉर्वे, आयरलैंड और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों ने पहले ही फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देने की घोषणा कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया में विपक्षी दल और कुछ विदेश नीति विशेषज्ञों का तर्क है कि हमास के ग़ाज़ा पर नियंत्रण के रहते फिलिस्तीन को मान्यता देना, परोक्ष रूप से उग्रवाद को वैध ठहराने जैसा होगा। दूसरी ओर, समर्थक मानते हैं कि यह कदम फिलिस्तीन की जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार को मज़बूती देगा और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
ऑस्ट्रेलिया फिलहाल "दो-राष्ट्र समाधान" का समर्थन करता है, जिसमें इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों को सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने का अधिकार हो। हालांकि, आधिकारिक मान्यता को लेकर सरकार ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
बर्क ने कहा, "हमारा रुख हमेशा यह रहा है कि शांति और स्थिरता के लिए दोनों पक्षों की वैध सरकारों को स्वीकार करना आवश्यक है। कुछ क्षेत्रों पर उग्रवादी नियंत्रण एक वास्तविकता हो सकती है, लेकिन इससे वैध शासन को नकारा नहीं जा सकता।"
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऑस्ट्रेलिया यह कदम उठाता है, तो वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का पहला बड़ा देश होगा जो फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देगा। इससे न केवल ऑस्ट्रेलिया की मध्य पूर्व में भूमिका पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका और इज़राइल के साथ उसके कूटनीतिक संबंधों पर भी नई चर्चा शुरू हो सकती है।