बेबी बूमर्स की सुपर टैक्स छूट पर गाज गिर सकती है

बेबी बूमर्स की सुपर टैक्स छूट पर गाज गिर सकती है

कैनबरा। ऑस्ट्रेलियाई खजांची जिम चाल्मर्स ने संकेत दिए हैं कि सरकार अब अमीर सेवानिवृत्त लोगों को मिलने वाली सुपरएन्युएशन (सेवानिवृत्ति निधि) पर टैक्स छूट की समीक्षा कर सकती है।

आर्थिक सुधारों पर तीन दिवसीय बैठक के बाद चाल्मर्स ने कहा कि टैक्स व्यवस्था को आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक न्यायसंगत बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवा और कामकाजी वर्ग को टैक्स में राहत देने के लिए अमीर रिटायर लोगों की रियायतों पर चोट की जा सकती है।

इंटरजेनरेशनल इक्विटी पर जोर

एबीसी चैनल पर दिए गए इंटरव्यू में खजांची से पूछा गया कि टैक्स व्यवस्था बुजुर्ग ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की तुलना में युवाओं के लिए अन्यायपूर्ण क्यों है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि टैक्स सुधारों का सबसे बड़ा लक्ष्य पीढ़ियों के बीच समानता (intergenerational equity) होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब भी हम टैक्स सिस्टम में सुधार पर विचार करेंगे, हमें आने वाली पीढ़ियों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।”

संभावित बदलाव

सरकार पहले ही 3 मिलियन डॉलर से अधिक की सुपर बैलेंस रखने वालों पर टैक्स दर 15% से बढ़ाकर 30% करने का संकेत दे चुकी है। अब माना जा रहा है कि इसे और आगे बढ़ाकर रिटायर्ड बेबी बूमर्स पर टैक्स का बोझ बढ़ाया जा सकता है।

इसके अलावा, उत्पादकता आयोग की उस सिफारिश पर भी विचार हो सकता है जिसमें 1 अरब डॉलर से कम टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए कंपनी टैक्स दर घटाकर 20% करने की बात कही गई है।

ग्रैटन इंस्टीट्यूट का सुझाव

टैक्स चर्चा के दौरान ग्रैटन इंस्टीट्यूट की सीईओ अरुणा सथानापल्ली ने भी कहा कि सुपरएन्युएशन छूट का दुरुपयोग हो रहा है। उनका सुझाव था कि रिटायरमेंट बचत को टैक्स-शेल्टर की बजाय वास्तविक सेवानिवृत्ति सुरक्षा का साधन बनाया जाए और अमीर रिटायर लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाए।

सरकार की मंशा

खजांची ने यह तो नहीं कहा कि बेबी बूमर्स से तुरंत टैक्स छूट छीन ली जाएगी, लेकिन उन्होंने यह जरूर माना कि आने वाले समय में कैबिनेट स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारी जिम्मेदारी है कि टैक्स सिस्टम कामकाजी वर्ग के लिए न्यायपूर्ण और टिकाऊ बने। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सही रास्ता होगा।”