मैनचेस्टर टेस्ट के पहले दिन भारतीय उप-कप्तान ऋषभ पंत चोटिल हो गए, जिससे एक बार फिर क्रिकेट में कन्कशन सब्स्टीट्यूशन (Concussion Substitution) नियम पर बहस छिड़ गई है। इस विषय पर भारत के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मौजूदा नियमों की समीक्षा की मांग की है।
सोनी स्पोर्ट्स पर कमेंट्री के दौरान गावस्कर ने स्पष्ट कहा, "अगर आप शॉर्ट-पिच गेंदबाजी खेलने में सक्षम नहीं हैं, तो बेहतर है कि आप टेनिस या गोल्फ खेलें, क्रिकेट नहीं।" उन्होंने कहा कि कन्कशन नियम का इस्तेमाल ऐसे खिलाड़ियों के लिए किया जा रहा है जो तेज गेंदों का सामना नहीं कर पाते, जो टेस्ट क्रिकेट की भावना के विपरीत है।
गावस्कर ने कहा कि कन्कशन रिप्लेसमेंट नियम को लाइक-टू-लाइक सब्स्टीट्यूट के नाम पर खिलाड़ियों की सीमाओं को छिपाने का ज़रिया बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोट लगने की स्थिति में जैसे ऋषभ पंत के मामले में हुआ, जहां उन्हें क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलते वक्त चोट लगी, वहां सब्स्टीट्यूट मिलना चाहिए – लेकिन इस नियम की सीमाएं तय होनी चाहिए।
गावस्कर की प्रमुख बातें:
कन्कशन सब्स्टीट्यूशन नियम पर गंभीर पुनर्विचार की जरूरत है।
शॉर्ट-पिच गेंदों से डरने वाले खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में नहीं होने चाहिए।
पंत जैसे स्पष्ट चोट के मामलों में सब्स्टीट्यूट जरूरी है।
निर्णय लेने के लिए डॉक्टर्स और विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति होनी चाहिए।
गावस्कर ने यह भी सुझाया कि अब जबकि आईसीसी के कई अहम पदों पर भारतीय बैठे हैं – जैसे सौरव गांगुली (क्रिकेट कमेटी प्रमुख), जय शाह (आईसीसी चेयरमैन), और संजोग गुप्ता (सीईओ) – तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए जो केवल खिलाड़ियों की चोटों और कन्कशन मामलों की समीक्षा करे।
उन्होंने यह भी आगाह किया कि अगर भारतीय नेतृत्व में यह नियम बदलते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी क्रिकेट-playing देशों की मीडिया इसे पक्षपात समझ सकती है। इसलिए एक तटस्थ और विशेषज्ञों वाली समिति ही ऐसा फैसला ले।