सिर्फ़ Gen-Z का समर्थन काफी नहीं, जानें कैसे सुशीला कार्की बन सकती हैं नेपाल की नई प्रधानमंत्री

सिर्फ़ Gen-Z का समर्थन काफी नहीं, जानें कैसे सुशीला कार्की बन सकती हैं नेपाल की नई प्रधानमंत्री

काठमांडू, 10 सितंबर 2025 — नेपाल की राजनीति इस समय बड़े उथल-पुथल से गुजर रही है। प्रधानमंत्री K.P. शर्मा ओली के इस्तीफ़े के बाद सत्ता का सवाल फिर से केंद्र में आ गया है। हाल ही में हुए Gen-Z प्रदर्शनों ने इस सत्ता संघर्ष को नई दिशा दे दी है। युवा आंदोलन की ताक़त से अब तक संसद और सड़कों पर कई नेताओं को चुनौती मिल चुकी है। इसी बीच सुर्ख़ियों में आईं नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (पूर्व) सुशीला कार्की, जिन्हें बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिल रहा है।


सुशीला कार्की: न्यायपालिका से सत्ता की दौड़ तक

सुशीला कार्की 2016 में नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी थीं। उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उन्होंने अपने फैसलों से यह साबित किया कि वह भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ सख़्त रवैया अपनाने में पीछे नहीं हटतीं। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की वकालत की। यही कारण है कि युवाओं के आंदोलन में उनका नाम भरोसे और ईमानदारी की प्रतीक के रूप में सबसे ऊपर उभरा।


Gen-Z का उत्साह और सीमाएँ

पिछले दिनों आयोजित एक वर्चुअल बैठक में—जिसमें 5,000 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया—पांच नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आए। इनमें सबसे अधिक समर्थन सुशीला कार्की को मिला। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ़ युवा समर्थन से सत्ता तक पहुँचना आसान नहीं होगा

नेपाल के संवैधानिक ढांचे के तहत, यदि कार्की को नेतृत्व सौंपा जाना है, तो उन्हें सबसे पहले सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगदेल का विश्वास हासिल करना होगा। इसके बाद अंतिम मुहर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की ओर से लगेगी। यह प्रक्रिया साफ़ करती है कि युवाओं की ऊर्जा और नारों के साथ-साथ संस्थागत समर्थन भी बेहद अहम है।


और कौन-कौन हैं रेस में?

Gen-Z के मंच से सिर्फ़ कार्की का ही नाम नहीं आया। चार अन्य चेहरे भी इस चर्चा में शामिल रहे:

  1. कुलमान घीसिंग – ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों और भ्रष्टाचार विरोधी छवि के कारण लोकप्रिय।

  2. सागर ढकाल – युवा राजनीतिज्ञ, शिक्षा और सामाजिक सुधार पर उनके विचार युवाओं में गूंजते हैं।

  3. हरका संपांग – धरातल से जुड़े नेता, जो सीधे जनता के मुद्दों पर काम करने के लिए जाने जाते हैं।

  4. एक यूट्यूबर – नाम उजागर नहीं हुआ, लेकिन संकेत दिए गए कि अगर बाकी विकल्प असफल हुए तो सोशल मीडिया से उभरा यह चेहरा भी दावेदारी कर सकता है।


राजनीतिक समीकरण और चुनौतियाँ

नेपाल की राजनीति में बार-बार अस्थिरता देखने को मिली है। इस बार Gen-Z आंदोलन ने सत्ता की बागडोर युवाओं की ओर मोड़ने की कोशिश की है। लेकिन अनुभवी विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन उतना ही भावनात्मक है, जितना कि राजनीतिक।

सुशीला कार्की को यदि वाकई प्रधानमंत्री पद की दावेदारी तक पहुँचना है, तो उन्हें न केवल युवाओं बल्कि राजनीतिक दलों, सेना और राष्ट्रपति कार्यालय को भी अपने साथ जोड़ना होगा। तभी यह परिवर्तन स्थायी रूप ले पाएगा।