कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी की नेता सुसान ले (Sussan Ley) ने आर्थिक मोर्चे पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि देश को अब "निर्भरता की संस्कृति" से बाहर निकलना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि लगातार बढ़ते सरकारी खर्च और सब्सिडियों पर आधारित नीतियाँ आने वाली पीढ़ियों को कर्ज के बोझ तले दबा सकती हैं।
ले ने अपनी पाँच सूत्रीय आर्थिक योजना पेश करते हुए कहा कि समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलिया को कम खर्च, कठोर वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता की राह पर लौटना चाहिए।
सुसान ले ने कहा—
"सरकार सब कुछ करेगी" जैसी मानसिकता ने समाज को आत्मनिर्भर बनने से रोक दिया है। यह संस्कृति बदलनी ही होगी। देश तभी आगे बढ़ेगा जब नागरिक अपने अवसर खुद बनाएँ और सरकार केवल सहायक भूमिका निभाए।"
सरकारी खर्च में कटौती – गैर-ज़रूरी योजनाओं पर लगाम लगाकर केवल ज़रूरी क्षेत्रों में निवेश।
कठोर वित्तीय अनुशासन – बजट घाटे और सार्वजनिक ऋण पर नियंत्रण।
निजी क्षेत्र को बढ़ावा – उद्यमशीलता और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना।
दीर्घकालिक स्थिरता – अल्पकालिक लोकलुभावन नीतियों की जगह टिकाऊ विकास पर ध्यान।
लिबरल मूल्यों की वापसी – आत्मनिर्भरता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा पर आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण।
ले का यह कदम केवल आर्थिक नीति नहीं बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। बीते कुछ समय से आलोचक कह रहे थे कि लिबरल पार्टी लेबर की तरह खर्च और सब्सिडी की राजनीति की ओर झुक गई है। लेकिन ले ने यह स्पष्ट कर दिया कि लिबरल पार्टी अपनी पुरानी “कम कर, कम खर्च और मजबूत अर्थव्यवस्था” वाली सोच पर लौट रही है।
सुसान ले की पाँच सूत्रीय आर्थिक योजना आने वाले दिनों में लिबरल पार्टी का मुख्य चुनावी एजेंडा बन सकती है। उनकी साफ़ चेतावनी है कि अगर अभी निर्भरता की संस्कृति पर लगाम नहीं लगी, तो कल ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संकट का सामना करेगा।