सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में बाल देखभाल केंद्रों (चाइल्डकेयर) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जहां कई माता-पिता और विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या बच्चों की सुरक्षा से अधिक प्राथमिकता अब कर्मचारियों की जेंडर आइडेंटिटी (लैंगिक पहचान) को दी जा रही है?
हाल ही में कुछ राज्यों में ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जहाँ बाल देखभाल संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति और व्यवहार के संदर्भ में लैंगिक पहचान को आधार बनाकर निर्णय लिए गए, भले ही उनसे जुड़े सुरक्षा जोखिम या आपत्ति जनक परिस्थितियाँ सामने आई हों। इससे बाल सुरक्षा विशेषज्ञों, माता-पिता संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं में चिंता की लहर दौड़ गई है।
माता-पिता की चिंता:
कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों की देखभाल के लिए बाल केंद्रों पर भरोसा करते हैं, लेकिन अगर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को 'जेंडर इनक्लूसिव पॉलिसी' के नाम पर नजरअंदाज किया जाएगा, तो यह खतरनाक स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञों की राय:
बाल सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संस्था के लिए सबसे पहली प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा होनी चाहिए। लैंगिक पहचान का सम्मान ज़रूरी है, लेकिन यदि कोई कर्मचारी जांच के दायरे में है या उन पर कोई संदेह है, तो केवल पहचान के आधार पर उन्हें संरक्षण देना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि “इंक्लूसिविटी का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता किया जाए।” वहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थानों को सख्त चेक और बैलेंस प्रक्रिया से गुजरना होता है और सुरक्षा से कभी समझौता नहीं किया जाता।