बाल देखभाल शुल्क में सुधार पर विचार: 'सब्सिडी मॉडल' खत्म कर सकता है सरकार

बाल देखभाल शुल्क में सुधार पर विचार: 'सब्सिडी मॉडल' खत्म कर सकता है सरकार

देश में बाल देखभाल (चाइल्डकेयर) व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र की लेबर सरकार एक "फ्लैट-फीस मॉडल" लागू करने पर विचार कर रही है, जिससे वर्तमान "सब्सिडी आधारित प्रणाली" को समाप्त किया जा सकता है। यह मुद्दा हाल ही में हुई सरकार की आर्थिक गोलमेज बैठक (इकोनॉमिक राउंडटेबल) में प्रमुख रूप से उठाया गया, जहां विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई सांसदों ने मौजूदा व्यवस्था की खामियों की ओर ध्यान दिलाया।

वर्तमान में, सरकार आय के आधार पर परिवारों को बाल देखभाल शुल्क में सब्सिडी प्रदान करती है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह मॉडल न तो पारदर्शी है और न ही सभी जरूरतमंद परिवारों तक समान लाभ पहुंचाता है। कई परिवारों को आवेदन प्रक्रिया जटिल लगती है, जबकि निजी चाइल्डकेयर सेंटरों के बढ़ते शुल्क ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।

बैठक में शामिल कई सांसदों का मानना है कि "फ्लैट-फीस मॉडल" लागू होने से सभी परिवारों के लिए शुल्क तय और समान रहेगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि बच्चों की देखभाल तक पहुंच भी आसान होगी। इससे खासतौर पर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

चाइल्डकेयर अधिकार समूहों का कहना है कि मौजूदा सब्सिडी प्रणाली अक्सर असमानताओं को जन्म देती है। “हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिले, चाहे उसके माता-पिता की आय कितनी भी हो,” एक प्रमुख सामाजिक संगठन के प्रवक्ता ने कहा।

सरकार के करीबी सूत्र बताते हैं कि इस प्रस्ताव पर वित्तीय और सामाजिक प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो इसका असर लाखों परिवारों पर पड़ेगा और कार्यरत माताओं की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि फ्लैट-फीस मॉडल के लिए सरकारी वित्तपोषण में भारी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, अन्यथा सेवा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, सरकार ने इस प्रस्ताव पर औपचारिक निर्णय नहीं लिया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि चाइल्डकेयर फंडिंग में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है।