मेलबर्न के महापौर निक रीस ने पैदल चलने वालों के लिए ‘कीप-लेफ्ट’ (बाईं ओर चलने) का नया क़ानून लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे मोबाइल में खोए हुए या फुटपाथ पर टेढ़े-मेढ़े चलने वाले लोगों पर जुर्माना लगाया जा सके। उनका कहना है कि शहर में पैदल यातायात लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में नए मेट्रो स्टेशनों से हर हफ़्ते लगभग पांच लाख अतिरिक्त लोग जुड़ेंगे।
‘कम गाजर, ज़्यादा डंडा’
रीस ने अख़बार द एज में लिखे अपने लेख में कहा, “फुटपाथ पर अराजकता को देखते हुए अब कम सलाह और ज़्यादा क़ानून की ज़रूरत है। यह समय है कि ‘कम गाजर और ज़्यादा डंडा’ अपनाया जाए।” उन्होंने स्क्रीन में डूबे हुए पैदल यात्रियों को ‘ज़ॉम्बी पीढ़ी’ बताते हुए कहा कि मेलबर्नवासियों को ‘पैदल चलने के तौर-तरीके’ सुधारने होंगे, वरना जुर्माना भरने के लिए तैयार रहना चाहिए।
क़ानून पर उठे सवाल
मेलबर्न के वकील जेरमी किंग का कहना है कि यह प्रस्ताव शहर में बढ़ते ‘सत्तावादी रुझान’ की ओर इशारा करता है। उन्होंने विशेष रूप से उस बात पर चिंता जताई कि इस प्रस्ताव पर प्रकाशित अख़बार की तस्वीर में महापौर रीस दो निजी सुरक्षा गार्ड्स के साथ नज़र आए। ये गार्ड अब स्थानीय क़ानून अधिकारियों के साथ ‘जटिल ऑन-स्ट्रीट व्यवहार’ संभालने में लगाए जा रहे हैं।
सिटी ऑफ मेलबर्न की वेबसाइट के मुताबिक मार्च 2025 से निजी सुरक्षा गार्ड्स को स्थानीय अधिकारियों के साथ तैनात करने का ‘हाइब्रिड प्रवर्तन मॉडल’ शुरू किया गया है।
‘निजी सुरक्षा से पुलिसिंग’ पर आपत्ति
किंग ने कहा, “ये निजी सुरक्षा कर्मी न तो पुलिस जैसी ट्रेनिंग रखते हैं, न ही पब्लिक सर्विस इंस्पेक्टर्स जैसी, लेकिन इन्हें गिरफ़्तारी और बल प्रयोग करने की अनुमति मिल रही है, जो बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने इसे कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान विक्टोरिया में अपनाई गई कठोर पुलिसिंग से तुलना की, जिसे कई लोग राज्य का सबसे अंधकारमय दौर मानते हैं।
‘कॉमेडी डिक्टेटरशिप’ जैसी स्थिति
किंग का मानना है कि इस तरह के फुटपाथ क़ानून का सबसे अधिक असर निम्न-आय वर्ग और अंग्रेज़ी न जानने वाले लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “लोगों को सड़क पार करने या फुटपाथ पर चलने के तरीके के लिए जुर्माना लगाना किसी तानाशाही—वह भी हास्यास्पद तानाशाही—जैसा है। यह मेलबर्न की पहचान नहीं है, इसे रोकना होगा।”
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