नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025 – अमेरिका के वरिष्ठ विदेश नीति विशेषज्ञ और सीनेटर मार्को रूबियो ने हाल ही में दिए एक बयान में कहा है कि अमेरिका की भारत से नाराज़गी केवल रूस से सस्ता तेल खरीदने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, दोनों देशों के संबंधों में तनाव के पीछे कई और गंभीर वजहें भी हैं, जिनमें रणनीतिक असहमति, व्यापार नीतियों में मतभेद और तकनीकी मोर्चों पर टकराव शामिल हैं।
भारत-रूस के रिश्तों पर चिंता
मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को भारत द्वारा रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने पर आपत्ति है, खासतौर पर तब जब पश्चिमी देश रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर आर्थिक प्रतिबंध लगा रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ एक हिस्सा है। “हमें भारत की रूस से बढ़ती नजदीकियां व्यापक रणनीतिक चिंता का विषय लगती हैं,” उन्होंने कहा।
तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में मतभेद
रूबियो ने बताया कि भारत की कुछ तकनीकी नीतियां और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का रवैया भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी कंपनियों को भारत में डेटा लोकलाइजेशन, टैरिफ और लाइसेंस जैसे मुद्दों पर कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि भारत चीनी टेक कंपनियों के मुकाबले अमेरिकी तकनीकी साझेदारों को ज्यादा तरजीह दे।
इंडो-पैसिफिक पर सहयोग में कमी
सीनेटर रूबियो ने यह भी कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप भारत का योगदान अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। “हम भारत को एक अहम साझेदार मानते हैं, लेकिन उसे हमारी साझेदारी की ज़िम्मेदारियों को और गंभीरता से लेना होगा,” उन्होंने कहा।
भारत की ओर से अभी प्रतिक्रिया नहीं
इस बयान पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों की बदलती प्रकृति की ओर इशारा करता है।
निष्कर्ष