सिडनी की ‘लिटिल इटली’ में स्थित एक छोटे से पैनिनो शॉप के दरवाज़े पर बैठी नन्ही वैलेंटिना की मुस्कान हर आने-जाने वाले को आकर्षित करती है। लेकिन यह मासूम मुस्कान एक ऐसे दर्द के पीछे छुपी है, जिसे समझना भी मुश्किल है।
महज 14 महीने की वैलेंटिना को एक ऐसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो अब तक दुनिया में सिर्फ 200 लोगों में पाई गई है — और ऑस्ट्रेलिया में पहली बार किसी को यह बीमारी हुई है। इस बीमारी का नाम है हायलाइन फाइब्रोमैटोसिस सिंड्रोम (Hyaline Fibromatosis Syndrome)।
यह बीमारी शरीर में तेज़ दर्द, जोड़ो का अकड़ना और पोषण न मिलने जैसी समस्याएं पैदा करती है। वैलेंटिना न तो अपने पैरों को सीधा कर सकती है और न ही अपने हाथ ऊपर उठा सकती है।
मां की ममता ने दिया पहला इशारा
वैलेंटिना की मां सारा बताती हैं कि जन्म के दूसरे दिन ही उन्हें एहसास हो गया था कि कुछ ठीक नहीं है। “मैंने जब नर्सों से कहा तो सबने कहा मैं ज़रूरत से ज़्यादा सोच रही हूं। लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है,” सारा ने कहा।
पहले चार महीने सारा ने डॉक्टरों को समझाने में बिताए, पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और चार हफ्ते की उम्र से ही वैलेंटिना का फिजियोथेरेपी शुरू करवा दिया।
दुर्लभ बीमारी, दुर्लभ संयोग
यह बीमारी तब होती है जब दोनों माता-पिता एक ही दुर्लभ जीन के वाहक होते हैं। सारा और उनके पति डोम के मामले में यह और भी असामान्य था क्योंकि वे आपस में रिश्तेदार नहीं हैं।
शोधकर्ताओं ने वैलेंटिना का डीएनए लेकर पर्थ की एक प्रयोगशाला में परीक्षण किया और पाया कि दोनों माता-पिता में इस जीन का बदलाव मौजूद है — एक ऐसा बदलाव जो पहले कभी दर्ज नहीं किया गया था।
“हम इस बीमारी की किताब लिख रहे हैं”
सारा कहती हैं, “इस बीमारी का इलाज क्या होगा, आगे क्या होगा, यह किसी को नहीं पता। हमारे लिए हर दिन एक नई सीख है। लेकिन जो बात हमें उम्मीद देती है, वो यह है कि वैलेंटिना बेहतर हो रही है।”
वैलेंटिना अब पैरों पर खड़ी हो पा रही है — बेशक स्प्लिंट्स के सहारे। लेकिन यह छोटी-सी जीत इस परिवार के लिए बहुत बड़ी है।
एक दुकान, एक मिशन
डोम और सारा की सैंडविच शॉप ‘डोम पैनिनो’ अब सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन बन चुकी है। वहीं बैठी वैलेंटिना, ग्राहकों का मुस्कान के साथ स्वागत करती है, और यह मुस्कान हर किसी को प्रेरणा देती है।
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हाल ही में एक विशेष आयोजन में, जिसमें वैलेंटिना के नाम पर सैंडविच बेचे गए, समुदाय ने $24,000 से अधिक की धनराशि जुटाई। यह पैसा ‘चिल्ड्रन मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ को दिया गया, जो जेनेटिक बीमारियों पर शोध कर रहा है।
मां का संकल्प
“यह सब यूं ही नहीं हो सकता,” सारा कहती हैं। “मैं अपनी बेटी की कहानी सबको बताना चाहती हूं। ताकि लोग समझें कि यह लड़ाई किस तरह की है। वैलेंटिना को जानना चाहिए कि वह कितनी अद्भुत, बहादुर और मजबूत है। और वह एक सामान्य जीवन जी सकती है।”