सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन से जुड़ी याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि "जहां हजारों श्रद्धालु आते हों, वह मंदिर निजी कैसे हो सकता है?"
वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि यह मंदिर एक "निजी धार्मिक संस्था" है, और राज्य सरकार मंदिर के धन और व्यवस्था पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रही है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "कोई धार्मिक स्थल, जहां जनसाधारण की आस्था जुड़ी हो और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हों, उसे निजी नहीं कहा जा सकता।"
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “प्रबंधन निजी हो सकता है, लेकिन कोई देवता निजी कैसे हो सकता है? मंदिर की आय सिर्फ आपके लिए नहीं, बल्कि विकास योजनाओं के लिए भी है।”
जब दीवान ने तर्क दिया कि मंदिर के पैसे से राज्य सरकार जमीन खरीदने की योजना बना रही है, तब अदालत ने दो टूक कहा, “मंदिर का पैसा आपकी जेब में क्यों जाए? अगर राज्य सरकार इसे तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए खर्च करना चाहती है, तो इसमें गलत क्या है?”
दीवान ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि सरकार ने मंदिर की जानकारी के बिना अदालत से आदेश हासिल किए हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
मामला उस अध्यादेश से जुड़ा है जिसमें मंदिर की व्यवस्थाएं राज्य सरकार द्वारा गठित एक ट्रस्ट को सौंपने का प्रावधान है। याचिकाकर्ता इसे मंदिर की स्वायत्तता पर हमला मानते हैं।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी पूछा कि “अध्यादेश लाने की इतनी जल्दी क्यों थी?” साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस संवेदनशील मसले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति गठित की जाए। समिति में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज, जिलाधिकारी और गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
कोर्ट ने वकील कपिल सिब्बल से कहा कि शिरडी, तिरुपति, अमृतसर जैसे स्थलों को देखें, जो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं और धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र बन चुके हैं। अदालत ने कहा कि बांके बिहारी मंदिर की पौराणिकता और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि वह सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक अंतरिम प्रबंधन समिति गठित कर सकती है, जो भक्तों से प्राप्त दानराशि का पारदर्शी और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करे।
अदालत में अब इस मामले की अगली सुनवाई कल सुबह 10:30 बजे होगी।