हर्ज़ोग के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

पैलेस्टाइन एक्शन ग्रुप ने NSW सरकार के आदेशों को बताया ‘अत्यधिक कठोर और अलोकतांत्रिक’

हर्ज़ोग के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स (NSW) राज्य में इज़राइल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग के हालिया दौरे के दौरान लागू किए गए कड़े सुरक्षा और प्रदर्शन-नियंत्रण उपायों को चुनौती देने वाला मामला अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ न्यू साउथ वेल्स के समक्ष पहुँचा है। इस मामले की सुनवाई को नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पैलेस्टाइन एक्शन ग्रुप ने राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया है कि हर्ज़ोग के दौरे के दौरान विरोध-प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंध “ड्रैकॉनियन” यानी अत्यधिक कठोर थे और उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया।

क्या हैं आरोप

याचिका में कहा गया है कि NSW सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बड़े इलाकों में प्रदर्शन पर रोक लगाई, भारी पुलिस तैनाती की गई और आयोजकों पर सख्त शर्तें थोप दी गईं। समूह का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि फिलिस्तीन समर्थक आवाज़ों को दबाना था।

ग्रुप के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि लोकतांत्रिक समाज में सरकार को विरोध और असहमति को सहन करना चाहिए, भले ही वह अंतरराष्ट्रीय नेताओं के दौरे के दौरान ही क्यों न हो। उनका कहना है कि सरकार के पास कम कठोर और संतुलित विकल्प मौजूद थे, जिन्हें अपनाया नहीं गया।

सरकार का पक्ष

NSW सरकार ने अपने बचाव में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता की यात्रा के दौरान सुरक्षा जोखिम असाधारण होते हैं। सरकार के अनुसार, किसी भी संभावित हिंसा, अव्यवस्था या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचने के लिए ये अस्थायी प्रतिबंध आवश्यक थे।

सरकारी वकीलों का कहना है कि लगाए गए आदेश किसी विशेष समूह को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थे।

व्यापक असर वाला मामला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल एक दौरे या एक संगठन तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले उच्च-स्तरीय विदेशी दौरों के दौरान लगाए जाने वाले सुरक्षा प्रतिबंधों की कानूनी सीमाएं तय कर सकता है।

मानवाधिकार संगठनों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े समूहों ने इस मामले में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। उनका मानना है कि अगर अदालत ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, तो भविष्य में प्रदर्शन के अधिकार पर और सख्त अंकुश लगाया जा सकता है।

नज़रें अदालत के फैसले पर

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई यह तय करेगी कि सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन कहाँ तक स्वीकार्य है। अदालत का निर्णय ऑस्ट्रेलिया के संवैधानिक ढांचे और नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।