सिडनी: दुष्कर्म के सभी आरोपों से छात्र बरी, अदालत ने बताया ‘सज्जन पुरुष’

सिडनी: दुष्कर्म के सभी आरोपों से छात्र बरी, अदालत ने बताया ‘सज्जन पुरुष’

सिडनी, 21 जून 2025 — सिडनी की जिला अदालत ने एक चर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए 21 वर्षीय क्रिस्टोफर के को बलात्कार, गला घोंटने, मारपीट और डराने-धमकाने के 18 आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला उस समय का है जब आरोपी और कथित पीड़िता दोनों 17 वर्षीय स्कूल छात्र थे।

अदालत में अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि क्रिस्टोफर ने बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाए थे, जिसमें पीड़िता के कथित शब्द – “अभी नहीं, क्या हम बाद में कर सकते हैं?” – को सहमति न होने का संकेत बताया गया।

लेकिन जूरी ने एक दिन से भी कम समय में निर्णय सुनाते हुए क्रिस्टोफर को सभी आरोपों से निर्दोष घोषित कर दिया।

‘सज्जन व्यक्ति, राक्षस नहीं’

क्रिस्टोफर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मार्गरेट कुनिन एससी ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को “स्टर्लिंग जेंटलमैन” कहा जाता है — एक पढ़ा-लिखा, संस्कारी और बिना किसी आपराधिक इतिहास वाला युवक, जो एकाएक किसी “भयावह राक्षस” में तब्दील नहीं हो सकता।

उन्होंने पीड़िता पर झूठे आरोप गढ़ने का आरोप लगाया और कहा कि उसने “एक बिगड़ी हुई, नाटकीय युवती की तरह व्यवहार करते हुए पूरी कहानी गढ़ी है।”

झूठी कहानी का आरोप

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि मामला तकनीकी सबूतों पर आधारित होना चाहिए, न कि भावनाओं पर। वहीं बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि क्रिस्टोफर ने पीड़िता की मां को कॉल कर उसकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई थी, जो एक अपराधी के व्यवहार के विपरीत है।

इसके अलावा, बचाव पक्ष ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि पीड़िता और उसके वर्तमान प्रेमी ने अपने रिश्ते को क्यों छुपाया। इससे बचाव पक्ष को यह संकेत मिला कि यह पीड़िता को पीड़ित के रूप में दिखाने की योजना का हिस्सा हो सकता है।

न्याय की जीत या असहमति की शुरुआत?

इस फैसले के बाद जहां आरोपी को राहत मिली, वहीं यह मामला उन लोगों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया है जो मानते हैं कि यौन हिंसा के आरोपों को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी ज़रूरी है कि हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिले।

यह मामला एक बार फिर न्याय प्रणाली, सामाजिक दृष्टिकोण, और युवा संबंधों की जटिलताओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।