सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित स्कॉट्स कॉलेज ने पाँच महीने पहले ही अपने 60 मिलियन डॉलर (लगभग 500 करोड़ रुपये) की लागत से बने नए स्टूडेंट सेंटर और लाइब्रेरी का उद्घाटन किया था। यह इमारत स्कॉटलैंड की बारोनियल शैली के महलों की तर्ज़ पर तैयार की गई है, जिसे आधुनिक शिक्षा का प्रतीक बताया गया। लेकिन अब इस आलीशान लाइब्रेरी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
अभिभावकों और छात्रों ने सवाल उठाया है कि इतनी भव्य और महंगी लाइब्रेरी में किताबें आखिर कहाँ हैं?
नए स्टूडेंट सेंटर में प्रवेश करते ही छात्रों का सामना हाई-टेक माहौल से होता है—खुले लाउंज, ग्लास वॉल्स, वाई-फाई ज़ोन और डिजिटल स्क्रीन। लेकिन जब बात पारंपरिक लाइब्रेरी की आती है तो दृश्य उल्टा है। किताबों से भरी अलमारियों की जगह अधिकतर खाली शेल्फ़ और कंप्यूटर टर्मिनल्स दिखाई देते हैं।
कॉलेज प्रशासन ने इसे “डिजिटल लर्निंग का भविष्य” बताते हुए कहा था कि यह स्पेस सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों को कोलैबोरेशन और रिसर्च के अवसर देने के लिए तैयार किया गया है।
अभिभावकों का मानना है कि बच्चों को तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ पारंपरिक किताबों की भी ज़रूरत होती है।
एक अभिभावक ने कहा—
“हमने सोचा था कि इतनी महंगी लाइब्रेरी में बच्चों को क्लासिक साहित्य से लेकर आधुनिक विज्ञान तक की दुनिया की बेहतरीन किताबें पढ़ने को मिलेंगी। लेकिन जब बच्चे वहाँ गए तो पता चला कि किताबें तो नाममात्र की हैं। यह निराशाजनक है।”
कुछ माता-पिता ने यह भी चिंता जताई कि सिर्फ डिजिटल साधनों पर निर्भर रहने से बच्चों की रीडिंग हैबिट (पढ़ने की आदत) कमजोर होगी। किताबों को छूने, पलटने और पढ़ने का अनुभव डिजिटल स्क्रीन से कहीं अलग होता है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बदलते समय के साथ शिक्षा की ज़रूरतें भी बदली हैं।
उनके अनुसार:
छात्रों को ई-बुक्स, ऑनलाइन रिसर्च जर्नल्स और इंटरनेशनल डेटाबेस तक पहुँच उपलब्ध कराई गई है।
डिजिटल स्रोतों की मदद से छात्र किसी भी समय, कहीं से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पारंपरिक किताबों की संख्या कम ज़रूर है, लेकिन पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
प्रशासन ने दावा किया कि यह मॉडल “भविष्य की शिक्षा प्रणाली” को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
यह मामला अब अकादमिक जगत में बहस का विषय बन गया है।
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा को तकनीक से जोड़ना ज़रूरी है, लेकिन किताबों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करना सही नहीं।
समर्थकों का तर्क: डिजिटल लाइब्रेरी बच्चों को वैश्विक स्तर पर अद्यतन और विविध संसाधन देती है।
विरोधियों का तर्क: पारंपरिक किताबें न सिर्फ ज्ञान देती हैं, बल्कि पढ़ने की गहराई और एकाग्रता भी विकसित करती हैं, जिसे स्क्रीन पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।