बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख नेता खालिदा जिया का निधन हो गया। उनके जाने के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति के उस दौर पर विराम लग गया, जिसे तीखे सत्ता संघर्ष, गहरी वैचारिक खाइयों और दो ध्रुवों में बंटी राजनीतिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है। खालिदा जिया को उनकी सख्ती और दृढ़ नेतृत्व शैली के कारण ‘आयरन लेडी’ कहा जाता था।
खालिदा जिया और अवामी लीग की नेता शेख हसीना के बीच चली दशकों पुरानी अदावत ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा और दशा तय की। यह टकराव सिर्फ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास और सत्ता की विरासत से भी गहराई से जुड़ा था।
खालिदा जिया जहां देश के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान की पत्नी थीं, वहीं शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। 1975 में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या और 1981 में जिया-उर-रहमान की हत्या—इन दो घटनाओं ने बांग्लादेश की राजनीति को स्थायी रूप से दो विरोधी खेमों में बांट दिया, जिनकी अगुवाई आगे चलकर इन दोनों नेताओं ने की।
1990 के दशक से खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच सत्ता की लड़ाई खुलकर सामने आई। जब खालिदा जिया सत्ता में थीं, तब शेख हसीना ने विपक्ष में रहते हुए सड़क से संसद तक आंदोलन किए। वहीं शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद खालिदा जिया को विपक्ष, अदालतों और जेल का सामना करना पड़ा। दोनों नेताओं पर एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध, लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग और शासन को कमजोर करने जैसे आरोप लगते रहे।
खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन विवादों और संघर्षों से भरा रहा, लेकिन इसमें संदेह नहीं कि उन्होंने पुरुषप्रधान राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनके नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी देश की प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी। उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में एक अध्याय समाप्त हुआ है—एक ऐसा अध्याय, जिसने देश की सत्ता संरचना और राजनीतिक विमर्श को दशकों तक प्रभावित किया।