ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक तनाव के बीच ‘सेव ऑस्ट्रेलिया’ रैलियों की घोषणा, एनएसडब्ल्यू प्रीमियर की चेतावनी के बावजूद जुटेंगे लोग

ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक तनाव के बीच ‘सेव ऑस्ट्रेलिया’ रैलियों की घोषणा, एनएसडब्ल्यू प्रीमियर की चेतावनी के बावजूद जुटेंगे लोग

सिडनी/मेलबर्न।
ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। इस बीच सिडनी और मेलबर्न में सप्ताहांत पर बड़े पैमाने पर जनसभाओं की योजना बनाई गई है। “सेव ऑस्ट्रेलिया” नाम से आयोजित इन रैलियों को लेकर न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने सार्वजनिक चेतावनी जारी की है और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाने के लिए नए कानूनी प्रावधानों का प्रस्ताव रखा है।

आयोजकों के अनुसार, सिडनी में अल्फ्रेड पार्क और मेलबर्न में पार्लियामेंट स्टेप्स पर हजारों लोगों के एकत्र होने की संभावना है। सिडनी में प्रस्तावित रैली एक मार्च के रूप में आयोजित की जा सकती है, जबकि मेलबर्न में इसे स्थिर (स्टैटिक) सभा के रूप में रखने का दावा किया गया है।

इन रैलियों का नेतृत्व फ्रीडम पार्टी के नेता मॉर्गन जोनस कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि वे प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़, मंत्री टोनी बर्क और पेनी वोंग को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मौजूदा आव्रजन नीतियाँ देश की शांति, स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा हैं।

मॉर्गन जोनस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कुछ क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर आव्रजन को वे “देशद्रोह” के रूप में देखते हैं। उन्होंने दावा किया कि कट्टरपंथी विचारधाराओं से जुड़े तत्वों की उपस्थिति से ऑस्ट्रेलियाई समाज और नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल के महीनों में यहूदी समुदाय के खिलाफ हमले, आराधनास्थलों में तोड़फोड़, धमकियाँ और भेदभाव की घटनाएँ बढ़ी हैं, और सरकार चरमपंथ पर नियंत्रण रखने में विफल रही है। हालांकि, इन दावों पर सरकार की ओर से असहमति जताई गई है।

आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि रैलियों में नस्लवाद, यहूदी-विरोध, इस्लामोफोबिया और हिंसा के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाई जाएगी। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की उकसावे वाली गतिविधि करने वालों को तुरंत हटाया जाए और पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया जाए।

इधर, एनएसडब्ल्यू प्रीमियर क्रिस मिन्स ने हाल की हिंसक घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पुलिस को “अभूतपूर्व अस्थायी शक्तियाँ” देने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में किसी आतंकवादी घटना को औपचारिक रूप से घोषित किया जाता है, तो पुलिस आयुक्त या उप-आयुक्त, पुलिस मंत्री की सहमति से, किसी विशेष क्षेत्र में सार्वजनिक सभाओं पर अस्थायी रोक लगा सकेंगे।

प्रीमियर मिन्स के अनुसार, यह कदम गर्मियों के दौरान किसी भी “संभावित विस्फोटक स्थिति” से बचने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून सामग्री-तटस्थ (कंटेंट-न्यूट्रल) होगा और इसका उद्देश्य केवल सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तावित रैलियाँ और सरकार के नए कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ये रैलियाँ किस रूप में होती हैं और सरकार अपने प्रस्तावित कानूनों को किस तरह लागू करती है।