ऑस्ट्रेलिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एंड्रयू वीटच नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया की मदद से 15 महिलाओं को शुक्राणु दान दिया, जिससे 27 आधे भाई-बहन (half-siblings) जन्मे हैं। यह मामला ‘शुक्राणु दान में कानून की कमी’ और ‘डोनर लूपहोल’ के रूप में चर्चा में आया है।
एंड्रयू वीटच ने ऑनलाइन डोनर-मैचिंग ग्रुप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन महिलाओं से संपर्क किया, जो स्वेच्छा से बच्चे चाहती थीं लेकिन उनके पार्टनर नहीं थे या वे अकेली मातृत्व की इच्छा रखती थीं। महिलाओं ने एंड्रयू से शुक्राणु दान के लिए सहमति दी और इसके बाद उन्होंने अपने निजी तौर पर घर या क्लीनिकल सेटअप के बजाय घर पर ही शुक्राणु दान किया।
इस प्रक्रिया के कारण 27 बच्चे पैदा हुए, जो आधे भाई-बहन हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये बच्चे अक्सर अपने-अपने घरों के आसपास कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही रहते हैं, जिसका पता चलते ही उनकी माताओं को बड़ा झटका लगा। कुछ माताओं को इस बात का भी पता चला है कि उनके बच्चे ‘क्लोज़ प्रॉक्सिमिटी’ में अपने आधे भाई-बहनों के साथ रहते हैं, जो भविष्य में जटिल पारिवारिक परिस्थितियों का कारण बन सकता है।
इस मामले ने ऑस्ट्रेलिया में शुक्राणु दान के नियमों पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और अनौपचारिक माध्यमों से शुक्राणु दान करने पर कोई क़ानूनी निगरानी नहीं होती, जिससे इस तरह के ‘डोनर लूपहोल’ (loophole) की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
कानूनी विशेषज्ञों का सुझाव है कि शुक्राणु दान के मामले में पारदर्शिता और कड़ी नियमावली बनानी चाहिए ताकि दाता की पहचान, दान की सीमा और बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें। साथ ही, ऐसे मामलों में चिकित्सा एवं कानूनी सहायता भी दी जानी चाहिए ताकि माता-पिता और बच्चे दोनों के हितों की रक्षा हो सके।
एंड्रयू के इस व्यवहार ने न केवल सामाजिक बल्कि नैतिक मुद्दे भी उठाए हैं। इस घटना ने एक बार फिर से ऑस्ट्रेलिया में ‘संपूर्ण डोनर रजिस्ट्रेशन’ और ‘डोनर सीमाएं’ तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।