एडिलेड के रहने वाले उबर ड्राइवर मोहम्मद शरीफ़ होतक को फेयर वर्क कमीशन से बड़ी राहत मिली है। झूठे आरोपों के चलते प्लेटफ़ॉर्म से उनका अकाउंट बंद कर दिया गया था, लेकिन अब उन्हें दो महीने की आय के बराबर मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया है।
24 मार्च की रात मोहम्मद शरीफ़ होतक ने तीन यात्रियों को कार में बिठाया। आरोप है कि वे कार में ही नशा करने लगे। जब ड्राइवर ने उन्हें उतरने के लिए कहा तो उस पर हमला कर दिया गया।
इसके बाद एक यात्री ने झूठा आरोप लगाया कि होतक ने उन्हें बेसबॉल बैट से धमकाया। इसी आधार पर 29 मार्च को उनका खाता निलंबित कर दिया गया और 8 अप्रैल को अंतिम निष्कासन नोटिस जारी हुआ।
होतक ने ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन की मदद से फेयर वर्क कमीशन में अपील की। सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि ड्राइवर पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद थे।
कमीशन ने माना कि खाते को बंद करने से उनकी आमदनी अचानक रुक गई और यह अनुचित था। इसलिए उबर को आदेश दिया गया कि वह उन्हें करीब दो महीने के नुकसान की भरपाई करे।
होतक पिछले चार साल से उबर चला रहे हैं और सप्ताह में 70 घंटे तक काम करते हैं। उन्होंने जीत के बाद कहा—
“हर उस ड्राइवर से कहना चाहता हूं जिसे अनुचित तरीके से प्लेटफ़ॉर्म से हटाया गया है या हटाने की धमकी दी जा रही है—आप अकेले नहीं हैं। जब आपकी आय अचानक बंद हो जाती है तो वह डरावना होता है, लेकिन हमें अधिकार मिले हैं।”
यह पहला मौका है जब किसी गिग वर्कर ने ऑस्ट्रेलिया में नए राष्ट्रीय कानून के तहत अनुचित निष्कासन के खिलाफ जीत हासिल की और आर्थिक मुआवज़ा भी मिला।
यह फैसला न सिर्फ होतक बल्कि हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स के लिए मिसाल बन सकता है।