नई दिल्ली।
भारत का 77वां गणतंत्र दिवस इस बार वैश्विक कूटनीति के लिहाज़ से खास माना जा रहा है। गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और वरिष्ठ यूरोपीय अधिकारी भी भारत पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि इस अवसर पर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर अहम प्रगति हो सकती है।
उर्सुला वॉन डेर लेयन वर्तमान में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। यह आयोग यूरोपीय संघ की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था है। वर्ष 2019 में वे इस पद पर चुनी जाने वाली पहली महिला बनीं और 2024 में लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद का विश्वास हासिल किया।
इस भूमिका में वे 27 यूरोपीय देशों की सामूहिक राजनीतिक और आर्थिक आवाज़ के रूप में दुनिया के सामने यूरोप का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके सख़्त निर्णयों और कार्यशैली के कारण उन्हें कई बार ‘यूरोप की आयरन लेडी’ भी कहा जाता है।
उर्सुला वॉन डेर लेयन का जन्म 8 अक्तूबर 1958 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हुआ। उनके पिता अर्न्स्ट आलब्रेख्ट यूरोपीय आयोग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके थे और बाद में जर्मनी के लोअर सैक्सनी राज्य के प्रमुख बने। मां हाइडी-एडेल आलब्रेख्ट शिक्षाविद् थीं।
राजनयिक माहौल में पली-बढ़ी उर्सुला को बचपन से ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति और बहुभाषी संस्कृति का अनुभव मिला। वे जर्मन और फ्रेंच भाषाओं में धाराप्रवाह हैं।
उर्सुला की पढ़ाई ब्रसेल्स के प्रतिष्ठित यूरोपियन स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने गोटिंगेन विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त की। शुरुआती दौर में उन्होंने अर्थशास्त्र पढ़ा, लेकिन बाद में चिकित्सा को करियर के रूप में चुना और हैनोवर मेडिकल स्कूल से डॉक्टर बनीं।
वे एक प्रशिक्षित मेडिकल डॉक्टर रहीं और कुछ समय तक अस्पताल में भी कार्य किया।
उर्सुला वॉन डेर लेयन ने 1990 के दशक में जर्मनी की प्रमुख पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। एंजेला मर्केल की सरकार में वे श्रम एवं सामाजिक मामलों की मंत्री और बाद में रक्षा मंत्री रहीं।
रक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने जर्मन सेना में आधुनिकीकरण और लैंगिक समानता पर जोर दिया, हालांकि इसी दौरान कुछ प्रशासनिक विवाद भी सामने आए, जिनकी संसदीय जांच हुई।
2019 में यूरोपीय आयोग की कमान संभालने के बाद उर्सुला ने जलवायु नीति, डिजिटल बदलाव, कोविड-19 संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे अहम मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में यूरोप ने सामूहिक रूप से कठिन वैश्विक परिस्थितियों का सामना किया।
उर्सुला वॉन डेर लेयन सात बच्चों की मां हैं। उनके पति हाइको वॉन डेर लेयन चिकित्सा प्रोफेसर और उद्योगपति हैं। कार्य और परिवार के बीच संतुलन को लेकर वे यूरोप में एक उदाहरण के तौर पर देखी जाती हैं।
विभिन्न आकलनों के अनुसार, 2025 तक उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 3.5 से 4 मिलियन डॉलर के बीच मानी जाती है। जर्मनी में उनका पारिवारिक फार्महाउस और स्विट्ज़रलैंड में अवकाश गृह है।
गणतंत्र दिवस पर उनकी मौजूदगी को भारत-ईयू रिश्तों में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते से लेकर तकनीक, जलवायु और रणनीतिक सहयोग तक—यह दौरा दोनों पक्षों के संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।