लंदन/सिडनी, 26 फरवरी 2026।
ब्रिटेन सरकार के नए प्रवेश नियम लागू होने के बाद करीब 2.5 लाख ऑस्ट्रेलियाई-ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई-आयरिश दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों के सामने यात्रा संकट खड़ा हो गया है। कई यात्रियों को आशंका है कि वैध ब्रिटिश या आयरिश पासपोर्ट न होने पर उन्हें उड़ान में सवार होने से रोका जा सकता है।
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (UK Home Office) द्वारा लागू किए गए डिजिटल बॉर्डर सिस्टम के तहत दोहरी नागरिकता रखने वाले यात्रियों को अब वैध ब्रिटिश या आयरिश पासपोर्ट के साथ ही ब्रिटेन में प्रवेश करना होगा। पहले कई लोग ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट के आधार पर यात्रा कर लेते थे।
हालांकि, तीखी प्रतिक्रिया और भ्रम की स्थिति के बाद ब्रिटेन सरकार ने अस्थायी राहत दी है। अब जिन यात्रियों के पास 1989 के बाद जारी हुआ एक्सपायर (समाप्त) ब्रिटिश पासपोर्ट है, वे उसे अपने वैध ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट के साथ दिखाकर नागरिकता प्रमाणित कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलियन ट्रैवल इंडस्ट्री एसोसिएशन (ATIA) के सीईओ डीन लॉन्ग ने चेतावनी दी है कि यह राहत “खुली छूट” नहीं है। एयरलाइंस के पास अंतिम अधिकार रहेगा कि वे किसी यात्री को बोर्डिंग दें या नहीं।
यदि दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो यात्री को ब्रिटेन में प्रवेश से रोका जा सकता है और वापसी की उड़ान का खर्च भी स्वयं उठाना पड़ सकता है।
दोहरी नागरिकता रखने वाले लोग इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) या सामान्य वीजा के लिए आवेदन नहीं कर सकते।
यदि वे ब्रिटिश या आयरिश पासपोर्ट के बिना यात्रा करना चाहें, तो उन्हें Certificate of Entitlement लेना होगा, जिसकी लागत लगभग 1130 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बताई जा रही है।
कई लोग, जो ऑस्ट्रेलिया में जन्मे हैं, हाल ही में जान पाए हैं कि वे वंश के आधार पर ब्रिटिश नागरिक भी हैं। अब ऐसे लोगों को ब्रिटेन जाने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
नए नियम लागू होते ही ट्रैवल एजेंसियों को बड़ी संख्या में “भ्रमित” यात्रियों के फोन आ रहे हैं। एजेंसियां यात्रियों से अपील कर रही हैं कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपने सभी दस्तावेजों की जांच कर लें।
पासपोर्ट की वैधता तुरंत जांचें।
यदि ब्रिटिश नागरिक हैं, तो वैध ब्रिटिश पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया शुरू करें।
एयरलाइन से यात्रा से पहले नियमों की पुष्टि करें।
डिजिटल दस्तावेज और नागरिकता प्रमाण अपडेट रखें।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बॉर्डर व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और भविष्य में नियमों का सख्ती से पालन होगा। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है।