2006 मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट केस: सभी 12 आरोपी बरी, महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती

2006 मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट केस: सभी 12 आरोपी बरी, महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी चुनौती

मुंबई, 22 जुलाई 2025:
देश को दहला देने वाले 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे और जांच में कई खामियां पाई गईं।

इस फैसले के तुरंत बाद महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। सरकार का कहना है कि यह मामला न केवल न्याय का है, बल्कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई से भी जुड़ा हुआ है।

क्या था मामला?

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में सात स्थानों पर बम धमाके हुए थे, जिनमें 189 लोग मारे गए थे और 800 से ज्यादा घायल हुए थे। यह हमला मुंबई की रफ्तार और आम जनता की सुरक्षा पर सीधा वार था।

मामले की जांच एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने की थी और 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई। 2015 में निचली अदालत ने 12 में से 5 को मौत की सज़ा और 7 को उम्रकैद दी थी।

हाईकोर्ट ने क्यों दिया बरी करने का फैसला?

हाईकोर्ट ने कहा कि:

  • आरोपियों के खिलाफ सबूत “संदेह के परे” साबित नहीं हो सके।

  • कई गवाहों की गवाही में विरोधाभास था।

  • फॉरेंसिक साक्ष्यों में गंभीर खामियां थीं।

  • जांच एजेंसियों की प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।

सरकार का पक्ष

महाराष्ट्र के गृह विभाग ने प्रेस को बताया कि यह फैसला पीड़ितों के लिए “न्याय में देरी नहीं, बल्कि न्याय से इनकार” जैसा है। सरकार इस केस को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी और वहां पूरे दमखम से अपनी बात रखेगी।