24 घंटे में 27 सौर तूफान: सूरज की उथल-पुथल से पृथ्वी पर कितना खतरा?

24 घंटे में 27 सौर तूफान: सूरज की उथल-पुथल से पृथ्वी पर कितना खतरा?

सूर्य पर अचानक बढ़ी असामान्य गतिविधियों ने दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 24 घंटे में सूर्य से 27 शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स (सौर ज्वालाएं) दर्ज की गईं, जिनमें से कुछ बेहद तीव्र श्रेणी की थीं। इसी के चलते वैश्विक स्तर पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो समेत कई संस्थान संभावित रेडियो ब्लैकआउट और संचार बाधाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

क्यों अचानक बढ़ी सूर्य की गतिविधि?

वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य की सतह पर मौजूद एक सक्रिय सनस्पॉट समूह (Active Region 14366) अचानक बेहद सक्रिय हो गया। इसी क्षेत्र से एक के बाद एक विस्फोट हुए, जिनमें चार बेहद शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स शामिल हैं। इनमें X8.1 श्रेणी का फ्लेयर सबसे ज्यादा ताकतवर माना जा रहा है, जो वर्ष 2026 का अब तक का सबसे तीव्र सौर विस्फोट है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने पुष्टि की है कि ये फ्लेयर्स 1 और 2 फरवरी के बीच चरम पर थे, जबकि सबसे शक्तिशाली X8.1 फ्लेयर 1 फरवरी को दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना अक्टूबर 2024 के बाद सबसे तेज गतिविधियों में से एक है और 1996 के बाद रिकॉर्ड की गई सबसे ज्यादा शक्तिशाली सौर घटनाओं में गिनी जा रही है।

पृथ्वी पर क्या पड़ेगा असर?

सोलर फ्लेयर्स से निकलने वाला तीव्र इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण प्रकाश की गति से पृथ्वी तक पहुंचता है। हालांकि इससे जमीन पर मौजूद इंसानों को सीधे नुकसान नहीं होता, लेकिन इसका असर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल, खासकर आयनोस्फीयर, पर साफ दिखाई देता है।

इसके चलते:

  • हाई-फ्रिक्वेंसी रेडियो संचार में ब्लैकआउट हो सकता है

  • GPS और नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी आ सकती है

  • सैटेलाइट्स पर विकिरण का दबाव बढ़ सकता है

  • ध्रुवीय क्षेत्रों से गुजरने वाली हवाई उड़ानों को जोखिम हो सकता है

  • ऑरोरा (ध्रुवीय रोशनी) की गतिविधि असामान्य रूप से बढ़ सकती है

भारत की तैयारी और निगरानी

इसरो फिलहाल अपने 50 से अधिक सक्रिय उपग्रहों की लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी तकनीकी नुकसान से समय रहते बचाव किया जा सके। वहीं, भारत का आदित्य-एल1 मिशन सूर्य की गतिविधियों पर रियल-टाइम डेटा उपलब्ध करा रहा है, जिससे अंतरिक्ष मौसम को समझने में मदद मिल रही है। भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप परियोजना की भी घोषणा की है।

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं

वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा सौर तूफानों से कोई बड़ा या सीधा खतरा नहीं है, लेकिन चूंकि सूर्य इस समय अपने 11 वर्षीय चक्र के सोलर मैक्सिमम चरण में है, इसलिए ऐसी घटनाएं आगे भी देखने को मिल सकती हैं। इसी वजह से अंतरिक्ष एजेंसियां सतर्क हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।