अचानक हो रहे हार्ट अटैक और कोविड वैक्सीन का संबंध? AIIMS-ICMR की स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

अचानक हो रहे हार्ट अटैक और कोविड वैक्सीन का संबंध? AIIMS-ICMR की स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

देशभर में हाल के वर्षों में अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने की घटनाएं खासकर युवाओं में तेजी से बढ़ी हैं। इस प्रवृत्ति को लेकर जनता में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा था कि क्या इसका कोई संबंध कोविड-19 वैक्सीनेशन से है? इसी गंभीर विषय पर AIIMS और ICMR ने संयुक्त रूप से एक विस्तृत अध्ययन (Study) किया है, जिसके निष्कर्ष अब सामने आए हैं।

क्या कहती है AIIMS-ICMR की रिपोर्ट?

AIIMS दिल्ली और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि कोविड वैक्सीन और अचानक कार्डियक अरेस्ट (Heart Attack) के मामलों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है
स्टडी में 18 से 45 वर्ष की आयु के 29 ऐसे मामलों का विश्लेषण किया गया जो 2021 और 2023 के बीच हार्ट अटैक से अचानक मौत का शिकार हुए।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से अधिकांश मामलों में हृदयाघात के पीछे अन्य जोखिम कारक जिम्मेदार थे, जैसे:

  • अत्यधिक शराब या धूम्रपान का सेवन

  • अत्यधिक शारीरिक मेहनत

  • नींद की कमी

  • मानसिक तनाव

  • पहले से मौजूद बीमारियाँ जैसे हाई बीपी या डायबिटीज

वैक्सीन नहीं, जीवनशैली है जिम्मेदार

AIIMS-ICMR की स्टडी में यह भी सामने आया कि कुछ लोग जो कोविड वैक्सीनेशन के बाद अचानक हृदयगति रुकने (Cardiac Arrest) से मरे, उन्होंने पिछले 48 घंटे में अत्यधिक व्यायाम किया था या मानसिक तनाव में थे।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोविड वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है और इसका सीधा संबंध हार्ट अटैक से नहीं है

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि

  • व्यायाम करें, लेकिन संतुलित मात्रा में

  • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं

  • तनाव से बचें और पर्याप्त नींद लें

  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें

AIIMS के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीलेश जैन ने बताया, “वैक्सीन ने लाखों लोगों की जान बचाई है। यह डर फैलाना कि वैक्सीन से हार्ट अटैक हो रहा है, पूरी तरह से वैज्ञानिक तथ्यों के विपरीत है।”

निष्कर्ष

AIIMS-ICMR की स्टडी से यह साफ हो गया है कि कोविड वैक्सीन के कारण हार्ट अटैक का खतरा नहीं बढ़ता
अचानक हृदय संबंधी मौतें मुख्यतः गलत जीवनशैली, तनाव, और पहले से मौजूद जोखिम कारकों के कारण होती हैं।

इस रिपोर्ट के आने से समाज में फैले डर और भ्रांतियों पर विराम लगने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपील की है कि लोग अफवाहों से बचें और वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें।