कोलकाता।
देश की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही के कारण सुर्खियों में है। करीब 13 वर्षों से लापता माना जा रहा एयर इंडिया का एक बोइंग यात्री विमान अब कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में खड़ा मिला है। यह मामला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि सरकारी विमानन प्रबंधन और रिकॉर्ड-रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 30 टन वज़न और करीब 30 मीटर लंबाई वाला यह बोइंग विमान तकनीकी खराबी के चलते वर्षों पहले उड़ान सेवा से हटा दिया गया था। इसके बाद इसे कोलकाता एयरपोर्ट पर पार्क कर दिया गया, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इसके बाद विमान से संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड, निगरानी या नियमित समीक्षा नहीं की गई।
सूत्रों का कहना है कि समय के साथ विमान विभिन्न फाइलों और विभागीय दस्तावेज़ों से “गायब” होता चला गया। न तो एयरलाइन स्तर पर और न ही एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से इस बात पर ध्यान दिया गया कि एक विशाल यात्री विमान वर्षों से एक ही स्थान पर निष्क्रिय खड़ा है।
हाल ही में जब हवाई अड्डे पर पुराने, अनुपयोगी और स्क्रैप किए जाने योग्य विमानों की सूची तैयार की जा रही थी, तब यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अधिकारियों को पता चला कि जिस विमान को वर्षों पहले सेवा से बाहर कर दिया गया था, वह अब भी एयरपोर्ट परिसर में मौजूद है।
इस मामले में सबसे गंभीर आर्थिक पहलू यह है कि इतने वर्षों की अवधि में विमान पर करोड़ों रुपये का पार्किंग शुल्क जमा हो चुका है। अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस शुल्क की जिम्मेदारी किस पर तय की जाएगी—एयर इंडिया पर या संबंधित प्रशासनिक विभागों पर।
एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि नियमों के अनुसार, लंबे समय तक खड़े विमानों पर पार्किंग शुल्क लिया जाता है। ऐसे में यह मामला केवल लापरवाही का ही नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक नुकसान का भी बनता जा रहा है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतने वर्षों तक यह विमान प्रशासन की नजरों से कैसे ओझल रहा और किन अधिकारियों या विभागों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं एयर इंडिया की ओर से इस विषय पर अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि जानकारों का मानना है कि यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में प्रबंधन, समन्वय और जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करता है।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय-समय पर परिसंपत्तियों की समीक्षा और निगरानी की जाती, तो न केवल इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था, बल्कि हवाई अड्डे की जगह और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होता।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।