ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति के लिए इज़राइल से संवाद और कूटनीतिक जुड़ाव बेहद आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंसा, उग्रता और नफरत फैलाने वाली गतिविधियाँ किसी भी तरह से शांति प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकतीं।
प्रधानमंत्री अल्बानीज़ ने चेतावनी दी कि जो राजनीतिक समूह या नेता ऐसे हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहे हैं, वे न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचा रहे हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया की जिम्मेदार भूमिका को भी कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा और धमकी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अल्बानीज़ ने ज़ोर देकर कहा कि ऑस्ट्रेलिया का रुख हमेशा से संतुलित रहा है और रहेगा। उन्होंने माना कि मध्य-पूर्व संघर्ष जटिल और संवेदनशील है, लेकिन समाधान का रास्ता संवाद, कूटनीति और आपसी समझ से होकर ही गुजरता है। इज़राइल से संबंध तोड़ना या संवाद से इनकार करना शांति प्रयासों को कमजोर करेगा।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ और राष्ट्रपति हर्ज़ोग के बीच हुई हालिया बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को दूर करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग, सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने संकेत दिया है कि वह मध्य-पूर्व संकट पर किसी एक पक्ष के बजाय शांति और स्थिरता के पक्ष में अपनी भूमिका निभाती रहेगी। अल्बानीज़ ने कहा कि चरमपंथ और राजनीतिक ध्रुवीकरण से दूर रहकर ही व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान निकाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह रुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करता है और यह संदेश देता है कि हिंसा नहीं, बल्कि संवाद ही शांति का रास्ता है।