कैनबरा/दुबई: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैन्य सहयोग के तहत एक उन्नत निगरानी विमान और सैनिकों को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल रक्षा और सुरक्षा के लिए उठाया गया है, लेकिन कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऑस्ट्रेलिया अप्रत्यक्ष रूप से इस संघर्ष का हिस्सा बन सकता है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल (ADF) का E-7A Wedgetail विमान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में तैनात किया जाएगा। इस मिशन के साथ लगभग 85 सैन्य कर्मी भी भेजे जा रहे हैं। यह तैनाती शुरुआती तौर पर चार सप्ताह के लिए होगी और इसका उद्देश्य खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र की निगरानी और सुरक्षा में मदद करना है।
सरकार के अनुसार, यह विमान लंबी दूरी तक रडार निगरानी कर सकता है और ड्रोन या मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने में मदद करता है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि उसका मिशन केवल “सामूहिक आत्म-रक्षा” तक सीमित रहेगा और वह किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लेगा।
हालांकि कुछ रक्षा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की तैनाती से स्थिति जटिल हो सकती है। उनका कहना है कि अगर ऑस्ट्रेलियाई विमान खाड़ी क्षेत्र में निगरानी और खुफिया जानकारी साझा करता है, तो ईरान जैसे देश इसे सीधे युद्ध में भागीदारी के रूप में देख सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Wedgetail विमान दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है और यह जानकारी मित्र देशों के लड़ाकू विमानों को दी जा सकती है, जिससे हमलों को रोकने में मदद मिलती है।
सरकार ने यह भी कहा कि मध्य-पूर्व में लगभग 1.15 लाख ऑस्ट्रेलियाई नागरिक रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इसी कारण क्षेत्रीय सहयोग के तहत यह कदम उठाया गया है।
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है—क्या यह केवल सुरक्षा सहयोग है या फिर एक बड़े युद्ध में नई भागीदारी की शुरुआत?