ऑस्ट्रेलिया में ईंधन संकट को लेकर सियासी हलचल तेज, भंडारण बढ़ाने पर जोर

ऑस्ट्रेलिया में ईंधन संकट को लेकर सियासी हलचल तेज, भंडारण बढ़ाने पर जोर

कैनबरा। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में फिर से उछाल और शांति वार्ताओं में ठहराव के बीच ऑस्ट्रेलिया में ईंधन सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी लिबरल पार्टी ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ सरकार से देश के ईंधन भंडार को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

विपक्ष के वरिष्ठ नेता एंगस टेलर ने घोषणा की है कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो ऑस्ट्रेलिया के ईंधन भंडार को दोगुना किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार आगामी मई बजट में ईंधन भंडारण क्षमता बढ़ाने से जुड़े बड़े फैसले लेने की तैयारी कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स बजट में ऐसे उपायों की घोषणा कर सकते हैं, जिनसे देश को भविष्य में ईंधन आपूर्ति में आने वाले झटकों से बचाया जा सके। दूसरी ओर, विपक्ष ने न्यूनतम भंडारण दायित्व (Minimum Stockholding Obligation) को बढ़ाकर 60 दिनों तक करने का प्रस्ताव रखा है।

इसके साथ ही, लगभग 800 मिलियन डॉलर की लागत से एक “ऑस्ट्रेलियन फ्यूल सिक्योरिटी फैसिलिटी” स्थापित करने की योजना भी सामने रखी गई है, जिसके तहत कम से कम 1 अरब लीटर अतिरिक्त ईंधन भंडारण की व्यवस्था की जाएगी।

टेलर ने कहा कि ईंधन आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। “अगर ईंधन रुकता है, तो ऑस्ट्रेलिया रुक जाता है। ट्रक नहीं चलेंगे, सुपरमार्केट खाली हो जाएंगे और व्यवसाय बंद हो जाएंगे,” उन्होंने कहा।

विपक्ष ने सरकार से 1 जनवरी 2027 से पहले ही न्यूनतम भंडारण स्तर बढ़ाने की अपील की है, जिससे आवश्यक ईंधनों की उपलब्धता में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच ऑस्ट्रेलिया के लिए ईंधन सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो गया है।