सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के जनरल प्रैक्टिशनर्स (GPs) ने देशभर में ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) के इलाज को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एकरूप सुधार की माँग की है। डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा प्रणाली बेहद जटिल है और इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा।
फिलहाल, अलग-अलग राज्यों में ADHD का इलाज और दवा लिखने के नियम अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों में केवल विशेषज्ञ ही इलाज की अनुमति देते हैं, जबकि क्वींसलैंड जैसे राज्य में GP सीधे ही मरीजों का निदान और इलाज कर सकते हैं। इस असमानता को डॉक्टरों ने “अनावश्यक रूप से जटिल और हानिकारक” बताया है।
न्यू साउथ वेल्स (NSW) सरकार ने ADHD इलाज को सरल बनाने के लिए नई योजना की घोषणा की है।
लगभग 1000 GP डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देकर दवा लिखने का अधिकार दिया जाएगा।
इनमें से 100 डॉक्टर को मरीजों का निदान और शुरुआती इलाज करने की भी अनुमति होगी।
योजना की शुरुआत बच्चों से होगी और बाद में वयस्कों पर भी लागू की जाएगी।
यह सुधार 2026 की शुरुआत से लागू होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुँचने के लिए लंबे इंतज़ार और अधिक खर्च से मरीजों को राहत मिलेगी।
ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों को सस्ती और समय पर सुविधा मिलेगी।
बच्चों और किशोरों को शुरुआती अवस्था में ही सही इलाज मिल पाएगा।
हालाँकि, कुछ मनोचिकित्सक मानते हैं कि GPs को अधिकार मिलने से गलत निदान और अत्यधिक दवा लिखने का खतरा बढ़ सकता है। ADHD के लक्षण कई बार अन्य मानसिक बीमारियों जैसे अवसाद और चिंता से मिलते-जुलते हैं, जिससे विशेषज्ञ की भूमिका अब भी अहम बनी रहती है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में ADHD की दवाओं की कमी (drug shortage) पहले से ही बड़ी समस्या बनी हुई है।