ऑस्ट्रेलिया में इज़राइली राष्ट्रपति की प्रस्तावित यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के वरिष्ठ सांसद Ed Husic ने इस यात्रा पर असहजता जताते हुए कहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए वह राष्ट्रपति की मौजूदगी को लेकर सहज नहीं हैं।
एड हुसिक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग़ाज़ा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि हजारों निर्दोष नागरिकों की मौत और बड़े पैमाने पर विस्थापन की पृष्ठभूमि में किसी भी उच्च-स्तरीय राजकीय यात्रा को बेहद संवेदनशील दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
हुसिक ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी देश, समुदाय या धर्म के विरुद्ध नहीं है। उनका कहना था कि यह सवाल मानवीय मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय कानून और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में वह उन लोगों की आवाज़ उठाने के लिए बाध्य हैं जो युद्ध और हिंसा से प्रभावित हुए हैं।
इस मुद्दे पर विपक्षी लिबरल पार्टी के सांसद Simon Kennedy ने अलग रुख अपनाया है। केनेडी ने कहा कि कूटनीतिक रिश्तों को बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक देश की ज़िम्मेदारी होती है। उनके अनुसार, मतभेदों के बावजूद संवाद और राजनयिक संपर्क अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम हिस्सा हैं।
केनेडी ने यह भी कहा कि किसी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा को केवल मौजूदा विवादों के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
इज़राइली राष्ट्रपति Isaac Herzog की प्रस्तावित यात्रा को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि सरकारी सूत्रों के अनुसार सुरक्षा, कूटनीतिक प्रभाव और घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का आकलन किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Australia की विदेश नीति, मध्य-पूर्व संकट पर उसके रुख और देश के भीतर बढ़ते राजनीतिक मतभेदों को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक बहस में और अधिक तेज़ हो सकता है।