(यह रिपोर्ट न्यूज़वायर और मैककेल इंस्टीट्यूट की जानकारी पर आधारित है।)
ऑस्ट्रेलिया के विनिर्माण क्षेत्र में छाए संकट के बादल अब और गहराते जा रहे हैं। एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो देश के हजारों श्रमिकों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, खासकर वे क्षेत्र जो रिफाइनिंग और स्मेल्टिंग जैसी भारी उद्योगों पर निर्भर हैं।
मैककेल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 73,000 नौकरियां उन इलाकों में खतरे में हैं जहां धातु परिष्करण और स्मेल्टिंग का कार्य होता है। इस संकट का सबसे बड़ा उदाहरण दक्षिण ऑस्ट्रेलिया का शहर पोर्ट पिरी है, जहां का सीसा स्मेल्टर स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह संयंत्र बंद होता है, तो पहले ही वर्ष में करीब 2,000 लोग, यानी 11% आबादी, शहर छोड़ सकते हैं। इससे स्थानीय समुदायों में आर्थिक व सामाजिक असंतुलन बढ़ सकता है।
मैककेल इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी एड कैवानफ ने कहा,
“पोर्ट पिरी जैसे औद्योगिक केंद्र क्षेत्रीय समुदायों की पीढ़ियों से रीढ़ रहे हैं। इन्हें खोना दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के लिए विनाशकारी हो सकता है।”
रिपोर्ट में चीन की आक्रामक औद्योगिक सब्सिडी नीति को संकट की बड़ी वजह बताया गया है। 2019 में चीन ने $407 अरब डॉलर से अधिक का निवेश केवल उद्योगों को सब्सिडी देने में किया, जिससे वह सस्ती दरों पर वैश्विक बाजार में धातुएं भेज रहा है। इससे ऑस्ट्रेलियाई उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है।
कैवानफ का कहना है कि
“चीन का अल्पकालिक लक्ष्य भारी औद्योगिक उत्पादन को अपने देश में केंद्रीकृत करना है और दीर्घकालिक रणनीति है प्रतिस्पर्धी देशों, जैसे ऑस्ट्रेलिया, की निर्माण क्षमता को कमजोर करना।”
रिपोर्ट ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक संयंत्र से दूसरे संयंत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो दीर्घकाल में व्यवहारिक नहीं है। इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की सरकार से मांग की गई है कि वह एक सुसंगठित राष्ट्रीय नीति बनाए जो पूरे विनिर्माण क्षेत्र को एकजुट तरीके से सुरक्षा प्रदान कर सके।
यदि इस दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में ऑस्ट्रेलिया का औद्योगिक आधार कमजोर हो सकता है और हजारों परिवारों की आजीविका संकट में पड़ सकती है।
मुख्य बिंदु:
चीन की सब्सिडी नीति से ऑस्ट्रेलियाई उद्योगों पर दबाव
पोर्ट पिरी जैसे शहरों में संयंत्र बंद होने की आशंका
हजारों नौकरियां और पूरी आबादी पर असर
सरकार से राष्ट्रीय स्तर की रणनीति बनाने की मांग