कैनबरा, 16 फरवरी 2026।
ऑस्ट्रेलिया की विपक्षी लिबरल पार्टी द्वारा तैयार एक कथित आंतरिक दस्तावेज़ में प्रवासन नीति को लेकर कड़े कदम उठाने की योजना सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि पार्टी सत्ता में आती है तो गाज़ा, सोमालिया, यमन और फिलीपींस के कुछ आतंक प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले आवेदकों के वीज़ा प्रसंस्करण पर अधिकतम तीन वर्षों तक अस्थायी रोक लगाई जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित नीति उन क्षेत्रों को लक्षित करती है जहाँ लंबे समय से आतंकवादी संगठनों का प्रभाव रहा है। इनमें गाज़ा पट्टी (जहाँ हाल तक हमास का नियंत्रण रहा), सोमालिया के कुछ हिस्से, यमन के उत्तरी क्षेत्र (जहाँ हूती संगठन सक्रिय है) तथा फिलीपींस के मिंडानाओ क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रस्ताव संबंधित देशों के सभी नागरिकों पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल उन इलाकों से आने वाले आवेदनों पर प्रभाव डाल सकता है जहाँ सुरक्षा संबंधी जोखिम अधिक माने जाते हैं।
लिबरल पार्टी के नेता एंगस टेलर ने हाल ही में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो लोकतंत्र, कानून के शासन और अभिव्यक्ति व धर्म की स्वतंत्रता जैसे “ऑस्ट्रेलियाई मूल्यों” को स्वीकार करते हों। उन्होंने संकेत दिया कि जो लोग इन मूल सिद्धांतों को नहीं मानते, उनके लिए “दरवाज़ा बंद” किया जाना चाहिए।
प्रस्तावित नीति में यह भी कहा गया है कि अस्थायी वीज़ा पर रह रहे लोगों द्वारा यदि तथाकथित “ऑस्ट्रेलियाई मूल्यों” का उल्लंघन किया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई, यहाँ तक कि निर्वासन, पर भी विचार किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, लिबरल पार्टी नेट ओवरसीज़ माइग्रेशन (NOM) को घटाकर 1,70,000 तक लाने का लक्ष्य रख सकती है। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (ABS) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 2024-25 वित्त वर्ष में यह संख्या 3,05,600 दर्ज की गई है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब यूनाइटेड किंगडम ने भी अवैध प्रवासन रोकने के उद्देश्य से कुछ अफ्रीकी देशों के नागरिकों के वीज़ा पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन नियंत्रण के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में पहले भी विशिष्ट क्षेत्रों से वीज़ा प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई जा चुकी है। वर्ष 2010 में गिलार्ड सरकार ने श्रीलंका से आने वाले शरणार्थी आवेदनों के प्रसंस्करण पर तीन महीने के लिए रोक लगाई थी, ताकि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी दिशानिर्देशों की समीक्षा की जा सके।
फिलहाल यह नीति प्रस्ताव आंतरिक स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है। यदि इसे औपचारिक रूप से अपनाया जाता है, तो इससे ऑस्ट्रेलिया की प्रवासन व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मानवाधिकार समूहों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज होने की संभावना है।