सिडनी। महामारी के बाद ऑस्ट्रेलियाई यात्रियों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां कभी अमेरिका उनकी पहली पसंद हुआ करता था, वहीं अब उनका रुख तेज़ी से एशियाई देशों की ओर बढ़ रहा है। जापान, चीन और वियतनाम जैसे देशों की यात्रा करने वाले ऑस्ट्रेलियाई पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके विपरीत, अमेरिका जाने वाले यात्रियों की संख्या अब भी कोविड-पूर्व स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव सिर्फ राजनीतिक माहौल या अमेरिका की छवि से जुड़ा नहीं है। दरअसल, अमेरिका की दूरी, लंबा सफर और बढ़ते हवाई किराए ने यात्रियों को रोकने का काम किया है। इसके अलावा, डॉलर की मज़बूती ने भी ऑस्ट्रेलियाई यात्रियों के लिए वहां घूमना महंगा बना दिया है।
एशियाई देशों की ओर रुझान के पीछे कई कारण हैं:
निकटता और कम यात्रा समय: जापान और वियतनाम जैसे देशों तक ऑस्ट्रेलिया से उड़ानें अपेक्षाकृत कम समय में पहुंचती हैं।
किफ़ायती खर्च: इन देशों में रहना, खाना और घूमना अमेरिका की तुलना में कहीं सस्ता पड़ता है।
संस्कृति और विविधता: जापान का आधुनिक शहर टोक्यो, चीन की ऐतिहासिक धरोहरें और वियतनाम का प्राकृतिक सौंदर्य यात्रियों को नई तरह का अनुभव दे रहे हैं।
पर्यटन ढांचे का विकास: हाल के वर्षों में एशियाई देशों ने अपने पर्यटन ढांचे को आधुनिक बनाया है, जिससे यात्रियों के लिए यात्रा और भी सुविधाजनक हो गई है।
सिडनी की रहने वाली 29 वर्षीय मेलानी कहती हैं, “मैंने पहले अमेरिका जाने का सोचा था, लेकिन टिकट महंगे थे और सफर भी बहुत लंबा था। इसके बजाय मैंने जापान चुना। वहां संस्कृति, खाना और तकनीक सब कुछ शानदार था।” इसी तरह मेलबर्न के जॉर्ज ने वियतनाम की यात्रा को यादगार बताया। “यहां लोग बहुत मेहमाननवाज़ हैं और प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत है। खर्च भी बहुत कम आता है।”
ट्रैवल एजेंसियों का मानना है कि आने वाले महीनों में ऑस्ट्रेलियाई यात्रियों का एशिया की ओर रुझान और तेज़ होगा। हालांकि, अमेरिका के लिए भी धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल एशिया ही सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।