कैनबरा, दिसंबर 2025।
ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा एक गहराता हुआ राष्ट्रीय संकट बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद समाज और राजनीतिक तंत्र की प्रतिक्रिया अब भी अपर्याप्त बनी हुई है। एक विश्व-स्तरीय नई रिपोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि देश अब भी इस भयावह वास्तविकता के प्रति “बहुत ज़्यादा सहज” बना हुआ है।
वर्ष 2024 ऑस्ट्रेलिया के लिए पिछले लगभग एक दशक का सबसे घातक साल रहा। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इस दौरान करीब 79 महिलाओं की हत्या हुई — औसतन हर चार दिन में एक महिला, जिनमें से अधिकांश को उनके वर्तमान या पूर्व साथी द्वारा मारा गया।
नवंबर में संसद के प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष की नेता ने मारी गई सभी महिलाओं के नाम राष्ट्रीय अभिलेख में पढ़े। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब आंकड़े इतने भयावह हैं, तो पीड़ितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और निर्णायक कदम अब तक क्यों नहीं उठाए गए।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि समस्या केवल आक्रोश की कमी नहीं है, बल्कि उस आक्रोश के अनुपात में ठोस कार्रवाई का अभाव है। घरेलू, पारिवारिक और यौन हिंसा से निपटने वाली सेवाएं लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ हैं।
राष्ट्रीय सहायता सेवा 1800 RESPECT के अनुसार, 2010 में शुरू होने के बाद से इसमें संपर्क करने वालों की संख्या में 3000 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। केवल पिछले वित्तीय वर्ष में ही सेवा को 3.42 लाख से अधिक कॉल, चैट और संदेश प्राप्त हुए। बढ़ते दबाव को देखते हुए संघीय सरकार ने इसके लिए 41.8 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की घोषणा की है, जिससे कुल निवेश 146.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
हालांकि, हिंसा-निरोध विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहायता अभी भी संकट के पैमाने के अनुरूप नहीं है। मार्च में पेश किए गए 2025–26 के बजट से उम्मीद थी कि जमीनी स्तर की सेवाओं के लिए बड़ा निवेश किया जाएगा, लेकिन वह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
और चिंता की बात यह रही कि लगभग 26 अरब डॉलर प्रति वर्ष की सामाजिक और आर्थिक लागत वाले इस मुद्दे को हालिया संघीय चुनाव अभियान के दौरान दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने लगभग नज़रअंदाज़ कर दिया।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक महिलाओं के खिलाफ हिंसा को राष्ट्रीय आपातकाल की तरह नहीं देखा जाएगा, तब तक आंकड़े बदलना मुश्किल होगा। सवाल अब यह नहीं है कि आक्रोश कैसे बनाए रखा जाए — बल्कि यह है कि कब और कैसे उस आक्रोश को वास्तविक कार्रवाई में बदला जाएगा।