कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़े इन दिनों तीखी आलोचना के घेरे में हैं। फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता देने के उनके हालिया फैसले ने न केवल घरेलू राजनीति में हलचल मचाई, बल्कि इसे अप्रत्याशित मोड़ भी मिला जब प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास ने खुले तौर पर इस कदम का समर्थन कर दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा था कि हमास इस पहल का “पूरी तरह विरोध” करेगा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की मान्यता शांति प्रक्रिया और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन में है। लेकिन इसके उलट, हमास के सह-संस्थापक ने मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया का निर्णय “सही दिशा में एक बड़ा कदम” है, जो फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों को मान्यता देता है।
इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। विपक्षी दलों और कई विश्लेषकों का कहना है कि इससे ऑस्ट्रेलिया की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ेगा और आतंकवाद के मुद्दे पर गलत संदेश जाएगा। सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया जा रहा है, जहां हैशटैग “#Shame” और “#PMBacklash” ट्रेंड कर रहे हैं। आलोचकों ने कहा कि “प्रधानमंत्री को इस स्थिति में शर्म से सिर झुका लेना चाहिए।”
राजनीतिक और कूटनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद के दो प्रमुख पहलू हैं—एक, घरेलू राजनीति में विपक्ष को मिला नया हथियार; दूसरा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऑस्ट्रेलिया के रुख पर उठते सवाल। पश्चिमी देशों में फिलिस्तीन मुद्दा पहले से ही संवेदनशील है, और ऐसे समय में किसी भी प्रतिबंधित संगठन का समर्थन राजनयिक चुनौतियां बढ़ा सकता है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक हमास के बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिलिस्तीन मान्यता का निर्णय “ऑस्ट्रेलिया के मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप” है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस विवाद को शांत कर पाती है या यह विपक्ष के लिए चुनावी मुद्दा बन जाएगा।