भारत नहीं लौटे तो भगोड़ा घोषित करने के खिलाफ याचिका पर नहीं होगी सुनवाई

Vijay Mallya मामले में हाईकोर्ट सख्त

भारत नहीं लौटे तो भगोड़ा घोषित करने के खिलाफ याचिका पर नहीं होगी सुनवाई

Bombay High Court ने उद्योगपति विजय माल्या को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वह भारत वापस नहीं लौटते, तब तक उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं की जाएगी। माल्या ने अपनी याचिका में Fugitive Economic Offenders Act (एफईओ) के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है।

अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं न्यायिक प्रक्रिया से दूर है और देश की अदालतों का सामना करने से बच रहा है, वह अदालत से किसी प्रकार की राहत की अपेक्षा नहीं कर सकता। पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि माल्या अपनी याचिका पर सुनवाई चाहते हैं तो उन्हें पहले भारत आकर कानून का सामना करना होगा।

न्यायिक प्रक्रिया से दूरी पर सख्ती

हाईकोर्ट ने यह भी दोहराया कि न्याय व्यवस्था का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। किसी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह विदेश में रहकर भारतीय अदालतों में राहत की मांग करे। अदालत ने संकेत दिया कि माल्या की अनुपस्थिति में उनकी याचिका पर आगे बढ़ना न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

क्या है मामला

विजय माल्या पर विभिन्न बैंकों से हजारों करोड़ रुपये के ऋण लेकर चूक करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वे कई वर्षों से विदेश में रह रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियों ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके तहत उनकी संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी की गई।

एफईओ अधिनियम, 2018 के तहत ऐसे आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं, जो जांच या मुकदमे से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो जाते हैं।

अदालत का स्पष्ट संदेश

हाईकोर्ट की टिप्पणी को न्यायिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि कानून से भागकर न्याय नहीं पाया जा सकता। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि माल्या भारत लौटते हैं या नहीं और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।