सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी इलाके में हुई हालिया गोलीबारी की घटना ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों में यह सामने आया है कि हमलावर नवीद अकरम वैचारिक रूप से एक विवादास्पद इस्लामिक मौलवी विसाम हद्दाद से प्रभावित था, जिन्हें अबू उसैद के नाम से भी जाना जाता है।
ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय प्रसारक ABC के चर्चित खोजी कार्यक्रम फोर कॉर्नर्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में विसाम हद्दाद को ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय प्रो–इस्लामिक स्टेट (ISIS) नेटवर्क का एक प्रमुख आध्यात्मिक मार्गदर्शक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, हद्दाद ने बीते वर्षों में पश्चिमी सिडनी के कई युवाओं पर गहरा वैचारिक प्रभाव डाला, जिनमें से कुछ बाद में हिंसक चरमपंथ की ओर बढ़े।
आतंकवाद और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि विसाम हद्दाद की कार्यशैली प्रत्यक्ष हिंसा को बढ़ावा देने के बजाय, धीरे-धीरे युवाओं को कट्टर विचारधारा की ओर आकर्षित करने की रही है। इसी कारण कुछ विश्लेषकों ने उन्हें “हनीपॉट” की संज्ञा दी है—ऐसा व्यक्ति जो संवेदनशील और भटके हुए युवाओं को अपने प्रभाव में लेकर चरमपंथी सोच की जमीन तैयार करता है।
गत अगस्त में आयोजित ‘मार्च फॉर ह्यूमैनिटी’ नामक सार्वजनिक कार्यक्रम में विसाम हद्दाद की उपस्थिति ने भी सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा था। इस दौरान वे करीब एक दर्जन युवा पुरुषों के साथ देखे गए थे। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ऐसे समूहों पर पहले से निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि इनमें शामिल कई युवक कट्टरपंथी विचारों के प्रति झुकाव दिखा चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार नाम सामने आने के बावजूद विसाम हद्दाद अब तक किसी गंभीर आपराधिक सजा से क्यों बचे हुए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हद्दाद अपने भाषणों और धार्मिक व्याख्याओं में इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, जो सीधे तौर पर हिंसा का आह्वान नहीं मानी जाती। यही कारण है कि मौजूदा कानूनों के तहत उनके खिलाफ ठोस मामला बनाना कठिन रहा है।
बॉन्डी गोलीकांड के बाद विपक्षी दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि आतंकवाद से जुड़े कानूनों की पुनः समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि केवल हथियार उठाने वालों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो वैचारिक रूप से हिंसा को जन्म देते हैं।
सरकार ने संकेत दिया है कि मामले की गहन जांच जारी है और यदि कोई ठोस सबूत सामने आता है, तो संबंधित नेटवर्क के अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर यह बहस तेज कर रही है कि क्या देश की सुरक्षा नीति केवल प्रत्यक्ष आतंकवादी कृत्यों तक सीमित रहनी चाहिए, या फिर कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार को भी उतनी ही गंभीर चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए।