बॉन्डी गोलीकांड की पीड़िता का आरोप: इलाज के दौरान अस्पताल ने बदला नाम, ‘मेरी पहचान छीन ली गई’

बॉन्डी गोलीकांड की पीड़िता का आरोप: इलाज के दौरान अस्पताल ने बदला नाम, ‘मेरी पहचान छीन ली गई’

सिडनी | 9 जनवरी 2026

बॉन्डी बीच पर हुए भयावह आतंकी हमले में घायल एक महिला ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि इलाज के दौरान “निजता की सुरक्षा” के नाम पर उसका नाम बदल दिया गया, जिससे उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी पहचान ही छीन ली गई हो

यह घटना 14 दिसंबर को आयोजित चानुकाह बाय द सी कार्यक्रम के दौरान हुई, जब गोलीबारी में 15 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। इस हमले में यहूदी समुदाय को निशाना बनाया गया था।

हमले में घायल महिला रोसालिया के सिर में गोली के छर्रे लगे थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीवी कार्यक्रम टुडे शो को बताया कि उन्हें शुरुआत में यह भी समझ नहीं आया कि यह गोलीबारी है।

रोसालिया ने कहा,
“हम ज़मीन पर लेटे हुए थे, चारों ओर चीख-पुकार थी। गोलियाँ हर तरफ उड़ रही थीं। यह बेहद डरावना अनुभव था।”

उनके पति ग्रेगरी ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बेटी की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे, लेकिन गोलियों की वजह से हिलना-डुलना भी संभव नहीं था।

अस्पताल में बदला गया नाम

इलाज के लिए रोसालिया को लिवरपूल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें ‘करेन जोन्स’ नाम से पंजीकृत किया गया। अस्पताल कर्मियों ने उनका कहना है कि सुरक्षा कारणों से उनका असली नाम और धार्मिक पहचान रिकॉर्ड में शामिल नहीं की गई।

रोसालिया ने कहा,
“मैं पहले ही हमले से टूट चुकी थी, और फिर अस्पताल में मेरी पहचान बदल दी गई। ऐसा लगा जैसे मुझे पूरी तरह मिटा दिया गया हो।”

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें ऐसा कलाई-बैंड पहनाया गया जिसमें कोई धार्मिक पहचान दर्ज नहीं थी।

40 साल से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं

रोसालिया ने भावुक होते हुए कहा कि वह और उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है।
“हम एक कम्युनिस्ट देश से बेहतर जीवन की तलाश में यहाँ आए थे। हमने इस देश से प्यार किया, लेकिन अब सवाल उठने लगे हैं।”

इस घटना के बाद अस्पताल की नीतियों और पीड़ितों की संवेदनशीलता को लेकर सार्वजनिक बहस शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन पीड़ित की पहचान और गरिमा का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।