नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2026 (डिजिटल डेस्क)।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के भारत पर संभावित प्रभावों का व्यापक आकलन किया गया और उससे निपटने के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई।
यह बैठक 28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के बाद दूसरी बार बुलाई गई। इन घटनाओं के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य सहित पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मौजूदा संकट का असर देश के आम नागरिकों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार हर आवश्यक कदम उठाए ताकि जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक वृद्धि न हो। साथ ही, अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए विश्वसनीय जानकारी का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात और उर्वरकों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री ने खरीफ और रबी सीजन के लिए उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, एलपीजी और एलएनजी जैसी जरूरी ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कैबिनेट सचिव भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक में कृषि, खाद्य सुरक्षा, MSME, निर्यात, व्यापार, जहाजरानी और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों पर संकट के अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों का भी विश्लेषण किया गया।