ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञ और कर नीति के जानकार John Ralph ने लेबर सरकार को पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax – CGT) नीति में बदलाव को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने मौजूदा CGT रियायतों में कटौती या सख्ती की, तो इसका सीधा असर निवेश, रोजगार और समग्र आर्थिक विकास पर पड़ेगा।
राल्फ ने कहा कि पूंजीगत लाभ कर में बदलाव से निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है। इससे संपत्ति, शेयर बाजार और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में निवेश घट सकता है, जिसका दीर्घकालिक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान CGT ढांचा निवेश को प्रोत्साहित करता है और इसे अस्थिर करना जोखिम भरा कदम होगा।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, CGT में सख्ती से रियल एस्टेट और इक्विटी बाजार में लेन-देन घट सकता है। राल्फ का कहना है कि “सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जो विकास की रफ्तार को धीमा कर दें।” उन्होंने आगाह किया कि पूंजी निर्माण में कमी से रोजगार सृजन भी प्रभावित हो सकता है।
राल्फ ने साथ ही आयकर व्यवस्था में ‘ब्रैकेट क्रीप’ (Bracket Creep) समाप्त करने की भी वकालत की। ब्रैकेट क्रीप वह स्थिति है जब महंगाई या वेतन वृद्धि के कारण करदाता उच्च टैक्स स्लैब में चले जाते हैं, भले ही उनकी वास्तविक क्रय शक्ति में खास वृद्धि न हुई हो।
उनका कहना है कि यह प्रक्रिया मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त कर बोझ डालती है और उपभोक्ता खर्च को प्रभावित करती है। उन्होंने सरकार से कर स्लैब को महंगाई के अनुरूप समायोजित करने की अपील की, ताकि करदाताओं को अनावश्यक भार न उठाना पड़े।
लेबर सरकार के लिए यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। एक ओर सरकार राजस्व बढ़ाकर सामाजिक योजनाओं को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर निवेश और विकास को बनाए रखना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी कर नीति बनानी होगी, जिससे राजस्व भी सुरक्षित रहे और निवेश का माहौल भी प्रभावित न हो।