ऑस्ट्रेलिया में कर सुधार की मांग: आयकर घटाएं, GST बढ़ाएं – विशेषज्ञों की राय

ऑस्ट्रेलिया में कर सुधार की मांग: आयकर घटाएं, GST बढ़ाएं – विशेषज्ञों की राय

ऑस्ट्रेलिया में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर के राष्ट्रीय कर्ज को देखते हुए अब देश में कर ढांचे में व्यापक सुधार की मांग उठने लगी है। कर विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को आयकर की दरों को घटाकर वस्तु एवं सेवा कर (GST) को बढ़ाना चाहिए ताकि आर्थिक विकास को गति दी जा सके और सरकार के राजस्व में स्थायित्व आए।

नेशनल प्रेस क्लब में बुधवार को दिए गए अपने संबोधन में ऑस्ट्रेलियाई ट्रेज़रर जिम चाल्मर्स ने संकेत दिया कि सरकार सुपरअकाउंट्स पर छूट वापस लेने के प्रस्ताव से आगे बढ़कर अब "बोल्ड" यानी साहसिक सुधारों की योजना बना रही है।

हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या इन सुधारों में GST की दर में बढ़ोतरी भी शामिल होगी, तो उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से नकारा नहीं और कहा, "मैं किसी भी संभावना को पूरी तरह से नकार या स्वीकार नहीं कर सकता, लेकिन व्यक्तिगत रूप से मैं इसके पक्ष में नहीं हूं।"

CPA ऑस्ट्रेलिया की नीति प्रमुख एलिनोर कासापिडिस ने NewsWire से बातचीत में कहा कि सरकार को GST बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा,

"GST एक अप्रत्यक्ष कर है और इसे वसूल करना आसान होता है क्योंकि यह उपभोग पर आधारित है। यदि हम उपभोग पर कर लगाते हैं और लोगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हैं, तो इससे व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट आय में वृद्धि होगी और देश की जीडीपी भी बढ़ेगी।"

उन्होंने सुझाव दिया कि GST को दो स्तरों पर बदला जाना चाहिए – इसका आधार बढ़ाया जाए और दर को भी। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में GST की दर 10% है और यह पिछले 23 वर्षों से अपरिवर्तित बनी हुई है।

GST में छूट बनी चुनौती:
वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के GST ढांचे में कई प्रकार की छूटें मौजूद हैं जैसे कि अधिकांश खाद्य सामग्री, कुछ स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पानी की आपूर्ति, कीमती धातुएं, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय डाक आदि।

कासापिडिस ने कहा,

"इन छूटों के कारण कर प्रणाली काफी जटिल हो गई है। यदि सरकार दर बढ़ाना चाहती है तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि कम आय वाले वर्ग, पेंशनभोगी और कमजोर वर्गों को उपयुक्त सहायता और क्षतिपूर्ति दी जाए।"

BDO के टैक्स पार्टनर माइकल एंडरसन ने भी इस विचार का समर्थन किया और कहा कि आयकर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि संघीय और राज्य सरकारों को मिलकर अप्रभावी करों को खत्म करने और कर आधार को चौड़ा करने की दिशा में काम करना चाहिए।