दावोस/नई दिल्ली।
तेज़ आर्थिक वृद्धि, गहरे संरचनात्मक सुधार और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे के दम पर भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के वार्षिक सम्मेलन में इस मुद्दे पर हुई अहम चर्चा में वैश्विक अर्थशास्त्रियों, उद्योग जगत के दिग्गजों और नीति-निर्माताओं ने भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक रुख जताया।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए भारत को सुधारों की रफ्तार बनाए रखने के साथ-साथ कई संरचनात्मक और सामाजिक चुनौतियों से भी निपटना होगा।
दावोस पैनल में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। लगातार मजबूत जीडीपी ग्रोथ, घरेलू मांग में इजाफा और सरकारी निवेश ने अर्थव्यवस्था को स्थिर आधार दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत का आर्थिक प्रदर्शन इसे अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाता है।
पैनल चर्चा में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए आर्थिक और संस्थागत सुधारों ने भारत को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जीएसटी व्यवस्था, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ और सप्लाई-चेन में भारत की बढ़ती भूमिका को निवेशकों के भरोसे की प्रमुख वजह माना गया।
ग्लोबल निवेशकों का मानना है कि भारत अब केवल बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के लिए एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौजूदा विकास रफ्तार बनी रहती है और सुधारों की प्रक्रिया जारी रहती है, तो भारत अगले कुछ वर्षों में जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल कुल जीडीपी का आकार बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विकास की गुणवत्ता और व्यापकता पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
दावोस में भारत की प्रशंसा के साथ-साथ कुछ अहम चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि—
प्रति व्यक्ति आय में तेज़ बढ़ोतरी
रोजगार सृजन
शिक्षा और कौशल विकास
पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी चुनौतियाँ
न्यायिक और प्रशासनिक सुधार
इन क्षेत्रों में ठोस प्रगति किए बिना आर्थिक शक्ति का लाभ आम लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाएगा।
पैनल में यह भी कहा गया कि भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत को सप्लाई-चेन हब, तकनीकी साझेदार और विकासशील देशों की आवाज़ के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की यह वैश्विक स्थिति उसकी आर्थिक ताकत को और मजबूती दे सकती है।