चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर एक बार फिर अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है। पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े एक कथित वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वीडियो में चन्नी को पार्टी संगठन में दलित समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने को लेकर नाराज़गी जताते हुए देखा-सुना जा रहा है, जिसके बाद कांग्रेस के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो पंजाब कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ से जुड़ी एक बैठक का है, जिसमें चन्नी ने संगठनात्मक ढांचे में संतुलन की कमी की ओर इशारा किया। कथित तौर पर उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति में दलित समाज की निर्णायक भूमिका होने के बावजूद पार्टी के शीर्ष पदों पर उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षित स्तर का नहीं है। वीडियो सामने आने के बाद इसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे मामला और तूल पकड़ गया।
हालांकि विवाद बढ़ने पर चरणजीत सिंह चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के खिलाफ टिप्पणी करना नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर सभी वर्गों की भागीदारी को मजबूत करने की बात रखना था। चन्नी ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा सामाजिक न्याय और समावेशिता पर आधारित रही है और वे उसी भावना के तहत अपनी बात रख रहे थे।
इस पूरे घटनाक्रम पर पंजाब कांग्रेस नेतृत्व भी सक्रिय नजर आया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि कांग्रेस कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करती और पार्टी ने दलित नेताओं को लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चन्नी स्वयं दलित समुदाय से आने वाले पहले मुख्यमंत्री रहे हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का प्रमाण है। वड़िंग ने अपील की कि आंतरिक मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उछालने के बजाय पार्टी फोरम पर सुलझाया जाना चाहिए।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पंजाब में संगठनात्मक पुनर्गठन और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में जातिगत प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा न केवल पार्टी की एकजुटता, बल्कि उसके चुनावी संदेश को भी प्रभावित कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की राजनीति में जातिगत संतुलन एक संवेदनशील विषय रहा है। दलित समुदाय राज्य की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा है और उनके राजनीतिक रुझान किसी भी दल की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर उठा यह विवाद विपक्षी दलों को पार्टी पर निशाना साधने का अवसर दे सकता है।
कुल मिलाकर, चन्नी से जुड़े इस वीडियो ने पंजाब कांग्रेस के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संगठन के भीतर सभी वर्गों को लेकर संतुलन और संवाद की प्रक्रिया पर्याप्त मजबूत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और क्या इससे कोई ठोस संगठनात्मक बदलाव सामने आता है।