ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने बड़े कॉरपोरेट समूहों द्वारा अपनाई जा रही कर्ज़ आधारित कर रणनीतियों और उनसे जुड़े कर नियमों की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय उद्योग जगत की उस शिकायत के बाद लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि कर प्रणाली में किए गए हालिया सुधार वैध और उत्पादक निवेश को प्रभावित कर रहे हैं।
सरकार ने बीते समय में ऐसे सख्त नियम लागू किए थे, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बड़ी कंपनियां अत्यधिक कर्ज़ लेकर कर देनदारी से अनुचित रूप से बच न सकें। इन नियमों के तहत उन व्यवस्थाओं पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, जिनके माध्यम से कंपनियां ब्याज भुगतान को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर अपने कर योग्य लाभ को कम कर देती थीं।
हालांकि, बड़े उद्योग संगठनों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का तर्क है कि ये नियम जरूरत से ज्यादा कठोर हो गए हैं। उनका कहना है कि इससे बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, निर्माण और अन्य पूंजी-प्रधान क्षेत्रों में होने वाला वास्तविक निवेश प्रभावित हो रहा है। उद्योग जगत ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों में लचीलापन नहीं लाया गया, तो इसका असर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
कोषाध्यक्ष जिम चाल्मर्स ने स्पष्ट किया कि सरकार कर प्रणाली में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह यह भी चाहती है कि निवेश और आर्थिक गतिविधियों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य यह समझना है कि मौजूदा नियम कहां तक प्रभावी हैं और किन बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता है।
सरकार के अनुसार, इस समीक्षा में कर विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से परामर्श किया जाएगा। समीक्षा पूरी होने के बाद यदि यह पाया गया कि नियमों के कारण वैध निवेश बाधित हो रहा है, तो आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कर बचाव और कर चोरी की प्रवृत्तियों पर सख्ती बनी रहे।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार और उद्योग जगत के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है, जिससे एक ओर कर प्रणाली की पारदर्शिता बनी रहेगी और दूसरी ओर निवेशकों का भरोसा भी कायम रहेगा।