कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया के फेडरल ट्रेज़रर Jim Chalmers ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा है कि बढ़ती महंगाई के पीछे सरकार का सार्वजनिक खर्च जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई का दबाव निजी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, न कि सरकारी नीतियों या खर्च से।
ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो Australian Bureau of Statistics (ABS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तक के 12 महीनों में वार्षिक महंगाई दर 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 3.8 प्रतिशत हो गई है। इन आंकड़ों के बाद देशभर में यह आशंका बढ़ गई है कि अगले सप्ताह होने वाली Reserve Bank of Australia (RBA) की पहली 2026 बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
महंगाई के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री चाल्मर्स ने कहा,
“अगर सार्वजनिक खर्च ही समस्या होता, तो पिछले साल ब्याज दरों में तीन कटौती और महंगाई में आई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलती।”
उन्होंने कहा कि जिन महीनों के दौरान ये महंगाई के आंकड़े दर्ज किए गए, उस समय अर्थव्यवस्था की कहानी निजी क्षेत्र की गतिविधियों से जुड़ी हुई थी, न कि सरकारी खर्च से।
ट्रेज़रर ने यह भी स्पष्ट किया कि रिज़र्व बैंक ने अपने हालिया बयानों में सार्वजनिक खर्च या सरकारी नीतियों को लगातार बढ़ती कीमतों का कारण नहीं बताया है।
उन्होंने कहा,
“हम मानते हैं कि महंगाई का दबाव हमारी अपेक्षा से अधिक समय तक बना हुआ है और आज के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं, लेकिन ये उस स्तर से काफी नीचे हैं जो हमें विरासत में मिला था।”
श्री चाल्मर्स ने आगे कहा कि वे महंगाई और उत्पादकता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
महंगाई में हालिया बढ़ोतरी का सीधा असर पहले से ही दबाव में चल रहे गृह-ऋण धारकों पर पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में ब्याज दरों के फैसले पर नज़र बनाए हुए हैं।