सिडनी में महिलाओं की जासूसी करने वाले चिली नागरिक को सजा, अदालत ने कहा – "ऑस्ट्रेलिया उसे यहां नहीं चाहता"

सिडनी में महिलाओं की जासूसी करने वाले चिली नागरिक को सजा, अदालत ने कहा – "ऑस्ट्रेलिया उसे यहां नहीं चाहता"

सिडनी।
तीन महिलाओं की नहाते समय गुप्त कैमरे से जासूसी करने वाले चिली नागरिक लुइस अल्बर्टो कैंसीनो मेना को सिडनी की एक अदालत ने कड़ी फटकार लगाते हुए 9 महीने की इंटेंसिव करेक्शन ऑर्डर (ICO) की सजा सुनाई है। साथ ही, आरोपी पर दो वर्षों के लिए AVO (Apprehended Violence Order) भी लगाया गया है, जिसके तहत वह पीड़ित महिलाओं से कोई संपर्क नहीं कर सकेगा।

39 वर्षीय मेना पर तीन महिलाओं को उनकी सहमति के बिना रिकॉर्ड करने का आरोप सिद्ध हुआ। उसने स्वीकार किया कि वह कलम के आकार वाले छिपे कैमरे से महीनों तक महिलाओं की नहाने की वीडियो रिकॉर्डिंग करता रहा। इस घिनौनी हरकत का भंडाफोड़ तब हुआ, जब घर की सफाई करने वाले कर्मचारियों को बाथरूम में एक संदिग्ध डिवाइस मिली, जिसे खोलने पर उन्होंने पाया कि वह रिकॉर्डिंग कर रही थी।

कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, पुलिस जांच में पता चला कि मेना ने अपने लैपटॉप पर प्रत्येक पीड़िता के नाम से फोल्डर बनाकर उसमें रिकॉर्ड की गई वीडियो को संग्रहित किया था। एक वीडियो में तो मेना स्वयं कैमरा बाथरूम में सेट करता हुआ साफ दिखाई दे रहा था।

मैजिस्ट्रेट माइकल बार्को ने सजा सुनाते हुए कहा,
"पोर्नोग्राफी देखना अपराध नहीं है, लेकिन किसी निर्दोष महिला को उसकी जानकारी या सहमति के बिना रिकॉर्ड करना बेहद विकृत मानसिकता को दर्शाता है। यह अपराध पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य पर आजीवन असर डालेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "जिस देश में आप अतिथि के रूप में आए हैं, वहां इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है। ऑस्ट्रेलियाई जनता आपको यहां नहीं चाहती।"

बार्को ने मेना की योजना बनाने की क्षमता और इसके पीछे की सोच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "आज जब इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सारी सामग्री उपलब्ध है, तब भी एक व्यक्ति कैसे इतनी योजना बनाकर छिपा कैमरा खरीदता है, उसे सेट करता है और फिर महिलाओं की निजता में घुसपैठ करता है?"

कोर्ट के आदेशानुसार, अब मेना को कम्युनिटी करेक्शन ऑफिसर की निगरानी में रहना होगा, और किसी भी तरह का उल्लंघन करने पर सीधे जेल भेजा जाएगा

यह मामला न सिर्फ महिलाओं की निजता के उल्लंघन का घिनौना उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि तकनीक का दुरुपयोग कैसे लोगों के जीवन को झकझोर सकता है। अदालत का यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा और निजता की रक्षा के लिए एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।