सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की जानी-मानी फैशन कंपनी, जो कभी देशभर में अपने ब्रांड और आकर्षक डिज़ाइनों के लिए मशहूर थी, अब पूरी तरह ढह चुकी है। अदालत ने कंपनी पर 25 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है, लेकिन दिवालियापन की स्थिति में फंसी यह कंपनी इतनी बड़ी रकम अदा करने में पूरी तरह असमर्थ है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की जांच कर रहे लिक्विडेटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बातें उजागर की हैं। जांच के अनुसार, लंबे समय से कंपनी की आर्थिक हालत बेहद खराब थी और इसके बावजूद प्रबंधन ने व्यवसाय को चालू रखा। इसे संभावित "असॉल्वेंट ट्रेडिंग" (Insolvent Trading) यानी दिवालिया स्थिति में व्यापार जारी रखना कहा जाता है, जो कानूनन अपराध है।
इसके साथ ही, कंपनी के निदेशकों और शीर्ष प्रबंधन पर अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का पालन न करने के आरोप भी लगे हैं। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी के भीतर वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की भारी कमी रही।
हालांकि, इन आरोपों के आधार पर अदालत में मुकदमा चलाने और निदेशकों के खिलाफ ठोस कानूनी कदम उठाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके। लिक्विडेटर्स ने स्पष्ट किया कि धन की कमी की वजह से ये मामले अदालत तक नहीं पहुंच पाए, और फिलहाल सभी संभावित दावे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।
ऑस्ट्रेलियाई फैशन और रिटेल सेक्टर इस घटनाक्रम से सकते में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के भरोसे को गहरा आघात पहुंचा सकता है। जब कोई बड़ा ब्रांड इस तरह से धराशायी होता है और उसके निदेशकों पर कार्रवाई नहीं हो पाती, तो इससे पूरे उद्योग की साख पर सवाल उठते हैं।
कंपनी के बंद होने से जहां सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुईं, वहीं सप्लायर और निवेशक भी भारी घाटे की चपेट में आ गए हैं। अब अदालत के आदेश और जुर्माने के बावजूद वसूली की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही।