मेलबर्न।
एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ यौन उत्पीड़न जैसे संगीन अपराधों में दोषी ठहराए गए कुछ लोग अब भी बच्चों के साथ काम करने की अनुमति प्राप्त कर पा रहे हैं। इस पर आलोचकों ने वर्तमान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें अपराधियों को कार्य अनुमति पत्र (वर्किंग विद चिल्ड्रन परमिट) जारी किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में विक्टोरियन सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (VCAT) ने ऐसे व्यक्तियों को बच्चों के साथ काम करने की अनुमति दी है, जिन्हें अदालत ने बच्चों के साथ अशोभनीय कृत्य या यौन उत्पीड़न के आरोपों में दोषी ठहराया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रणाली कई खामियों से भरी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अदालत में उपयोग की गई महत्वपूर्ण जानकारी, जो किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं कर पाती, उसे भी नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसी जानकारी, जो पूरी तरह से साक्ष्य न होने के कारण सज़ा में नहीं बदलती, लेकिन संभावित खतरे का संकेत देती है – उसे परमिट देने के निर्णय में ध्यान में नहीं लिया जाता।
एक बाल अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, "यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया में ऐसे तत्वों को दरकिनार किया जा रहा है जो भविष्य में गंभीर खतरे का कारण बन सकते हैं।"
वहीं दूसरी ओर, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाएगी और जिन मामलों में आपराधिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद वर्किंग विद चिल्ड्रन परमिट दिया गया है, उन्हें पुनः जांचा जाएगा।
सवाल यह उठता है कि जब एक व्यक्ति बच्चों के खिलाफ यौन अपराध में दोषी पाया गया हो, तो उसे कैसे बच्चों के साथ काम करने की अनुमति दी जा सकती है? यह न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि समाज की सबसे संवेदनशील इकाई – बच्चों – की सुरक्षा पर भी सीधा खतरा है।