ऑस्ट्रेलिया के कई राज्यों में इस रविवार, 5 अप्रैल को डेलाइट सेविंग टाइम (DST) समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही लाखों लोगों को अपनी घड़ियां एक घंटा पीछे करनी होंगी। रविवार तड़के 3 बजे समय को एक घंटा पीछे कर 2 बजे कर दिया जाएगा।
न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया, साउथ ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया, ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी और नॉरफॉक आइलैंड में यह बदलाव लागू होगा। वहीं क्वींसलैंड, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया, नॉर्दर्न टेरिटरी, क्रिसमस आइलैंड और कोकोस (कीलिंग) आइलैंड्स में डेलाइट सेविंग लागू नहीं होता, इसलिए वहां समय में कोई बदलाव नहीं होगा।
डेलाइट सेविंग खत्म होने पर लोगों को एक अतिरिक्त घंटे की नींद मिलती है, जिससे शरीर को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में शरीर की जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) प्रभावित हो सकती है।
सलाह दी जाती है कि लोग पहले से अपनी सोने-जागने की आदतों में थोड़ा बदलाव करें और सुबह की धूप लें, ताकि नई दिनचर्या में आसानी से ढल सकें।
फेयर वर्क ओम्बड्समैन के अनुसार, रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि शिफ्ट समय के कारण एक घंटे बढ़ जाती है, तो आमतौर पर भुगतान “घड़ी के हिसाब से” ही किया जाएगा, जब तक कि अनुबंध में अलग से उल्लेख न हो।
समय में बदलाव का असर रात की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार, घड़ियां पीछे करने के बाद पहले सप्ताह में रेस्टोरेंट, बार और रिटेल में खर्च लगभग 13% तक घट जाता है। वहीं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग भी करीब 15% तक कम हो सकता है।
जल्दी अंधेरा होने के कारण लोगों की आवाजाही कम हो जाती है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।
इस बदलाव का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि सुबह जल्दी उजाला होने से लोग सुबह के समय व्यायाम और अन्य बाहरी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। साथ ही, जल्दी अंधेरा होने से लोग जल्दी सोने की आदत विकसित कर सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में डेलाइट सेविंग की शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऊर्जा बचाने के उद्देश्य से हुई थी। तस्मानिया ने इसे 1967 में स्थायी रूप से अपनाया, जिसके बाद अन्य राज्यों ने भी इसे लागू किया। हालांकि, क्वींसलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ने जनमत संग्रह में इसे अस्वीकार कर दिया।
अब डेलाइट सेविंग दोबारा 4 अक्टूबर 2026 को लागू किया जाएगा।