रहस्यमयी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग तेज़ – JobSeeker पेमेंट रद्द होने पर मचा बवाल

रहस्यमयी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग तेज़ – JobSeeker पेमेंट रद्द होने पर मचा बवाल

कैनबरा | 6 अगस्त 2025
ऑस्ट्रेलिया में बेरोजगारों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा भुगतान योजनाओं के तहत JobSeeker पेमेंट की स्वचालित रद्दीकरण प्रणाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार की एक ‘गुप्त रिपोर्ट’ को लेकर अब विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने रोजगार मंत्री अमांडा रिशवर्थ पर सवालों की बौछार कर दी है।

दरअसल, डेलॉइट (Deloitte) द्वारा तैयार की गई एक समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2022 से जुलाई 2024 के बीच 946 JobSeeker भुगतान अवैध रूप से रद्द किए गए थे। यह सब एक स्वचालित प्रणाली के तहत हुआ, जिसे Targeted Compliance Framework (TCF) कहा जाता है।

कॉमनवेल्थ ओम्बड्समैन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्वचालित प्रणाली न सिर्फ अस्थिर है, बल्कि इसके चलते कई गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को जबरदस्त नुकसान झेलना पड़ा है। कई लोगों की ज़रूरी मदद बिना किसी मानवीय समीक्षा के बंद कर दी गई, जिससे उनकी जिंदगी संकट में आ गई।

देरी पर उठे सवाल

यह भी सामने आया है कि डिपार्टमेंट ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड वर्कप्लेस रिलेशन्स (DEWR) की सचिव नताली जेम्स को इस प्रणाली की खामियों की जानकारी अप्रैल 2022 में दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसे रोकने में 10 महीने का समय लगा दिया।

वहीं, रोजगार मंत्री अमांडा रिशवर्थ के पास जून 2025 में तैयार हुई डेलॉइट रिपोर्ट मौजूद है, लेकिन इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। ग्रीन्स पार्टी की सांसद पेनी ऑलमैन-पायन और ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ सोशल सर्विस (ACOSS) की प्रमुख कैसेंड्रा गोल्डी ने इस रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की है।

विपक्ष का आरोप – "रोबोडेब्ट जैसा नया कांड"

पेनी ऑलमैन-पायन ने कहा,

“यह रिपोर्ट एक महीने से सरकार के पास है, लेकिन अभी तक इसे छुपाया जा रहा है। यह वही गलती दोहराई जा रही है जो पहले रोबोडेब्ट स्कैंडल में हुई थी।”

उन्होंने कहा कि अगर तुरंत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और गलत भुगतान रद्द करने की प्रक्रिया को नहीं रोका गया, तो हजारों लोग जो पहले से ही गरीबी में जी रहे हैं, और भी बुरी हालत में आ जाएंगे।

ACOSS का कड़ा रुख

सामाजिक सेवाओं की सबसे बड़ी संस्था ACOSS की प्रमुख कैसेंड्रा गोल्डी ने कहा,

“डेलॉइट रिपोर्ट को सार्वजनिक करो। वह कानूनी सलाह भी जारी करो जिससे यह पुष्टि हुई थी कि यह प्रक्रिया अवैध थी। लोगों पर तकनीक के नाम पर नरक थोपा गया है।”

उन्होंने कहा कि इस तरह की स्वचालित व्यवस्था में मानवीय समझ और संवेदनशीलता की कमी होती है, और इससे सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और हाशिए पर खड़े नागरिकों को होता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री अमांडा रिशवर्थ ने रिपोर्ट को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने ओम्बड्समैन की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार इसकी सिफारिशों को “समयबद्ध तरीके से लागू करेगी।”

“यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि जब भी कानून में बदलाव किया जाए, तो सरकारी सिस्टम को भी उसी के अनुसार तैयार करना जरूरी होता है – खासकर तब जब वह सिस्टम ज़रूरतमंद लोगों के साथ जुड़ा हो।”

क्या आगे होगा?

अब यह मामला संसद के पटल पर है और विपक्ष रिपोर्ट को ज़रूरी सार्वजनिक दस्तावेज मानते हुए दबाव बना रहा है। यदि रिपोर्ट जारी नहीं होती है तो सरकार पर और राजनीतिक दबाव बढ़ना तय है।

नज़रें अब इस पर टिकी हैं कि क्या मंत्री अमांडा रिशवर्थ इस रिपोर्ट को जनता के सामने लाकर पारदर्शिता दिखाएंगी, या फिर यह विवाद और गहराएगा।